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Delhi NCR News: जीटीबी अस्पताल में स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए 10 बेड आरक्षित
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अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए अलग से 10 बेड की व्यवस्था की गई है। फिलहाल अस्पताल में किसी भी मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी है। दिल्ली के कई अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध दवाओं के स्टॉक के अनुसार, लोक नायक अस्पताल में ओसेल्टामिविर 75 एमजी की करीब 7,500 टैबलेट उपलब्ध हैं। जीटीबी अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में फिलहाल इस दवा का स्टॉक नहीं है।
डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के हर मरीज को ओसेल्टामिविर देने की जरूरत नहीं होती। अधिकांश मरीजों का इलाज ओपीडी में ही किया जा सकता है। केवल गंभीर संक्रमण के खतरे वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने या विशेष उपचार की जरूरत पड़ सकती है। जीटीबी अस्पताल के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि करीब पांच से सात प्रतिशत मरीजों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक नहीं है कि अतिरिक्त बेड आरक्षित करने की जरूरत पड़े।
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पूर्वी दिल्ली। स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए अलग से 10 बेड की व्यवस्था की गई है। फिलहाल अस्पताल में किसी भी मरीज को भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी है। दिल्ली के कई अस्पतालों में स्वाइन फ्लू के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरल दवा ओसेल्टामिविर का स्टॉक उपलब्ध नहीं है। दिल्ली राज्य स्वास्थ्य मिशन की वेबसाइट पर उपलब्ध दवाओं के स्टॉक के अनुसार, लोक नायक अस्पताल में ओसेल्टामिविर 75 एमजी की करीब 7,500 टैबलेट उपलब्ध हैं। जीटीबी अस्पताल समेत अन्य अस्पतालों में फिलहाल इस दवा का स्टॉक नहीं है।
डॉक्टरों का कहना है कि स्वाइन फ्लू के हर मरीज को ओसेल्टामिविर देने की जरूरत नहीं होती। अधिकांश मरीजों का इलाज ओपीडी में ही किया जा सकता है। केवल गंभीर संक्रमण के खतरे वाले मरीजों को अस्पताल में भर्ती करने या विशेष उपचार की जरूरत पड़ सकती है। जीटीबी अस्पताल के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि करीब पांच से सात प्रतिशत मरीजों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि फिलहाल अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी अधिक नहीं है कि अतिरिक्त बेड आरक्षित करने की जरूरत पड़े।
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