पावर कॉरपोरेशन में 1000 करोड़ का घोटाला
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पावर कॉरपोरेशन में आनलाइन बिलिंग सिस्टम का जमकर दुरुपयोग किया गया। इसमें जगह-जगह बिलों में घपला किया गया है। गाजियाबाद से कानपुर तक करीब एक हजार करोड़ रुपये की गड़बड़ी प्रारंभिक जांच में सामने आने से अफसरों में हड़कंप मच गया है।
इसकी जांच नोएडा और कानपुर की विजिलेंस टीम संयुक्त रूप से कर रही हैं। घपले का सारा बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ा है।
चीफ इंजीनियर राशिद अबरार का कहना है कि हमारा पहला काम बिल जमा कराना है। घपले वाला ज्यादातर राजस्व जमा हो चुका है। जांच-कार्रवाई तो कभी भी करा लो।
कैसे हुआ हुआ घपला?
इसकी रिकवरी करने के लिए कारपोरेशन ने ऐसे उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए। उन पर बकाया बताते हुए बिल जमा कराने को दबाव बनाया गया। बिल न देने तक उनको सप्लाई नहीं दी गई। विजयनगर क्षेत्र में ही सैकड़ों उपभोक्ताओं के मीटर उखाड़े गए। बिल बिजली परेशानी झेलने पर उपभोक्ताओं को दोबारा बिल जमा कराना पड़ा।
विजिलेंस विभाग पहुंचा मामला
बिलों में बड़ा फर्जीवाड़ा होने पर यह मामला विजिलेंस विभाग को सौंप दिया गया। 15 दिन से चल रही जांच में विजिलेंस अफसरों को घपलों के साक्ष्य मिल गए हैं। कई जगह कारपोरेशन अफसरों की मिलीभगत-लापरवाही भी सामने आई है।
एसपी विजिलेंस एके शर्मा का कहना है कि बिलिंग घपला करीब एक हजार करोड़ रुपये का है। घपले वाले जिलों की पुलिस का भी सहयोग लिया जा रहा है। आरोपियों को चिंहित करने के लिए सर्विलांस स्पेशलिस्ट और अन्य विशेषज्ञों का सहयोग ले रहे हैं। आरोपियों के चिन्हित होने पर कार्रवाई की जाएगी। पूरे मामले पर लखनऊ से नजर रखी जा रही है।
अफसर मामले को दबाने जुटे
घपले की धनराशि जमा कराने के साथ ही कॉरपोरेशन अफसरों ने मामले को दबाना शुरू कर दिया। जांच कराने की बात कहते जरूर रहे, लेकिन न तो जांच शुरू कराई गई और न ही रिपोर्ट दर्ज कराई गईं।
चीफ इंजीनियर गाजियाबाद संभाग राशिद अबरार विजयनगर के बिलिंग घपले में जांच कमेटी गठित करने और रिपोर्ट दर्ज कराने के दावे करते रहे, लेकिन एक माह बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
पुलिस सर्विलांस टीम की जांच में आरोपियों के नाम सामने आए, इसमें कारपोरेशन अफसरों के घिरने पर चीफ आफिस से मामले को दबा लिया गया।