{"_id":"594bcd174f1c1bac128b48df","slug":"villagers-can-live-with-leopard","type":"story","status":"publish","title_hn":"वन अधिकारियों ने दिए ग्रामीणों को गुर, कुछ तरीकों से हम रह सकते हैं तेंदुए के साथ ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वन अधिकारियों ने दिए ग्रामीणों को गुर, कुछ तरीकों से हम रह सकते हैं तेंदुए के साथ
ब्यूरो/ अमर उजाला, पौड़ी
Updated Thu, 22 Jun 2017 07:28 PM IST
विज्ञापन
leopard
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजय गांधी नेशनल पार्क, महाराष्ट्र के रेंज अधिकारी शैलेश देवरिया ने कहा कि वर्ष 2020 के बाद वन विभाग को तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरे की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विज्ञापन
मानव व वन्य जीव संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग द्वारा खिर्सू के वन विश्राम गृह में आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के पहले दिन देवरिया ने यह बात कही। उन्होंने बताया कि तेंदुआ हमेशा आबादी के नजदीक जंगलों में रहता है।
विज्ञापन
कुछ उपाय और तरीकों से हम गुलदार के साथ रहना सीख सकते हैं। इसको लेकर योजना बन रही है। इससे गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा नहीं लगाना पड़ेगा। नासिक से आए रेंज अधिकारी सुनील वाडेकर ने बताया कि तेंदुआ कभी-कभी बीस घंटे तक सोता है, इसलिए वह सबसे आसान शिकार को ही अपना भोजन बनाता है।
विज्ञापन
कार्यशाला में अन्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को तेंदुओं की जीवन शैली के बारे में जानकारी दी। यह प्रशिक्षण कार्यशाला शुक्रवार को भी चलेगी।