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Uttarakhand: पहली बार 31 एमबीबीएस डॉक्टर सीखेंगे आयुर्वेद पद्धति से इलाज के तरीके, प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

Mon, 03 Apr 2023 08:53 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून
अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 03 Apr 2023 08:53 PM IST
सार

मुख्य सचिव ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों का सम्मान करना चाहिए। जहां इमरजेंसी ट्रामा, एक्सीडेंट इत्यादि में एलोपैथिक पद्धति का सारी दुनिया में कोई विकल्प नहीं है।

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Uttarakhand News: 31 allopathy doctors will learn methods of treatment from Ayurveda method For the first time
डॉक्टर (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के एमबीबीएस डॉक्टर पहली बार आयुर्वेद पद्धति से इलाज के तरीके सीखेंगे। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 31 डॉक्टरों का छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है। मुख्य सचिव डॉ. एसएस संधु ने कार्यक्रम की शुरुआत की। हर्रावाला स्थित आयुर्वेद विश्वविद्यालय में एचएनबी मेडिकल यूनिवर्सिटी और आयुर्वेद विश्वविद्यालय की ओर से एलोपैथी डॉक्टरों को आयुर्वेद में मर्म और नाड़ी चिकित्सा के अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए खान-पान, औषधि के बारे में जानकारी दी जाएगी।

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मुख्य सचिव ने कहा कि सभी चिकित्सा पद्धतियों का सम्मान करना चाहिए। जहां इमरजेंसी ट्रामा, एक्सीडेंट इत्यादि में एलोपैथिक पद्धति का सारी दुनिया में कोई विकल्प नहीं है। वही स्वास्थ्य रक्षण, दिनचर्या रितुचर्या या स्वास्थ्य वर्धक आहार विहार औषधि, प्रकृति निर्धारण, मर्म, नाड़ी पद्धति श्रेष्ठ है। दोनों पद्धतियों के एकीकरण की आवश्यकता है। प्राचीन समय से ही आयुर्वेद चिकित्सा सुविधा दी जा रही है। आज के समय में आयुर्वेद व एलोपैथी पद्धति को आपस में तालमेल बनाकर लोगों का बेहतर इलाज किया जा सकता है।
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मुख्य सचिव ने कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में योग और आयुर्वेद महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। आयुर्वेद रोगों के इलाज के बजाय रोकथाम पर अधिक बल देता है। योग और आयुर्वेद के अनुरूप जीवन शैली अपनाकर शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं। साथ ही आयुर्वेद स्वस्थ जीवन शैली का आधार है, जो तनावमुक्त जीवन जीने को बढ़ावा देता है। इस मौके पर उन्होंने प्रशिक्षण के लिए तैयार मॉडल का विमोचन किया।

कार्यक्रम में सचिव स्वास्थ्य डॉ. आर. राजेश कुमार, सचिव आयुष डाॅ. पंकज कुमार पांडे, एचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमचंद पांडे, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय प्रो. सुनील कुमार जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक डाॅ. विनीता शाह, एनएचएम निदेशक डाॅ. सरोज नैथानी, डाॅ. अजय कुमार नगरकर, प्रो. अनूप कुमार गक्खड़, पंकज कुमार शर्मा, डीसी सिंह, डाॅ. दीपक कुमार सेमवाल, डाॅ. राजीव कुरेले, डाॅ. एचएम चंदोला, डाॅ. नंद किशोर दाधिच आदि मौजूद थे।

आयुर्वेद व मर्म चिकित्सा से कम किया जा सकता है एंटीबायोटिक दवाइयों का उपयोग

आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुनील जोशी ने कहा, आयुर्वेद विज्ञान दुनिया का प्राचीनतम चिकित्सा विज्ञान है। आयुर्वेद के स्वास्थ्य रक्षण संबंधी मौलिक सिद्धांतों, त्रिदोष, पंचमहाभूत, धातु, त्रिगुण, अष्टविथ नाड़ी परीक्षण, प्रकृति निर्धारण, दिनचर्या रितुचर्या, रात्रिचर्या, सद्वृत, स्वास्थ्य वर्धक आहार विहार एवं औषधियों आदि के माध्यम से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा सकते हैं। किसी भी तरह की बीमारी, वैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण होने पर हम मजबूती के साथ प्रतिरोध कर सकें। आयुर्वेद और मर्म चिकित्सा के माध्यम से एंटीबायोटिक एवं औषधियों के उपयोग को कम किया जा सकता है।

सामुदायिक स्वास्थ्य में मील का पत्थर साबित होगा कार्यक्रम

एचएनबी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमचंद ने कहा कि अपनी तरह का एक विशिष्ट कार्यक्रम है। इसे देश में पहली बार आयोजित किया जा रहा है। पब्लिक हेल्थ के प्रबंधन में यह कोर्स मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम को 15 दिवसीय या एक माह एवं सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स के रूप में संचालित करने की आवश्यकता है।

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