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काम की बात: उत्तराखंड का मंडुवा और झंगोरा घटाएगा मोटापा, मिलेट्स की पौष्टिकता पर शोध में जुटे वैज्ञानिक

Thu, 03 Sep 2026 12:53 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, हैदराबाद।
अमर उजाला ब्यूरो, हैदराबाद। Published by: Renu Saklani Updated Thu, 03 Sep 2026 12:53 PM IST
सार

पहाड़ों की थाली में सदियों से शामिल रहे मंडुवा और झंगोरा अब आधुनिक पोषण विज्ञान के लिए भी खास हो गए हैं। बढ़ते मोटापे की चुनौती के बीच इन पारंपरिक अनाजों की पौष्टिकता को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं।

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Uttarakhand Mandua and Jhangora May Help Fight Obesity ICMR-NIN Conducts Research on Millets read All
हैदराबाद के राष्ट्रीय पोषण संस्थान में तकनीकी सत्र में पोषक तत्वों की जानकारी देते डॉ. सुब्बाराव एम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड के परंपरागत मोटे अनाज मंडुवा और झंगोरा के पोषक तत्वों पर आईसीएमआर का राष्ट्रीय पोषण संस्थान शोध कर रहा है। इससे देश में बढ़ रहे मोटापे को काबू करने की राह आसान हो जाएगी। राष्ट्रीय पोषण संस्थान की निदेशक डॉ.भारती कुलकर्णी का कहना है कि अगर महिला के गर्भधारण से पूर्व ही पोषण पर ध्यान दिया जाए तो बच्चा स्वस्थ होगा।

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बुधवार को उत्तराखंड के पत्रकारों का प्रतिनिधिमंडल पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुंद्रियाल के नेतृत्व में आईसीएमआर-राष्ट्रीय पोषण संस्थान पहुंचा। यहां संस्थान की निदेशक डॉ.भारती कुलकर्णी दल से रूबरू हुईं। उन्होंने कहा कि पोषण का स्वस्थ जीवन में अहम स्थान है। उन्होंने कहा कि दो साल तक के बच्चे को शुगर नहीं देना चाहिए। कहा कि देश में मोटापा तेजी से चुनौती बनता जा रहा है।

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संस्थान ने हाल ही में संपदा सर्वे किया है, जिसमें दो लाख से अधिक जगहों पर, 81 हजार घरों में उनकी टीम गई थी। उनके खानपान, जीवनशैली का अध्ययन किया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट के आधार पर संस्थान अपने सुझाव केंद्र को देगा। बताया कि केंद्रीय कृषि मंत्रालय के निर्देश पर संस्थान के वैज्ञानिक उत्तराखंड के परंपरागत मिलेट्स मंडुवा, झंगोरा व चौलाई की पौष्टिकता पर शोध कर रहा है।
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शहर की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर
इन सभी मिलेट्स की न्यूट्रियंट वैल्यू पता चलेगी, जिससे भविष्य में मोटापे की चुनौती से निपटना आसान हो जाएगा। साथ ही रागी (फिंगर मिलेट) के सेवन से एनीमिया (खून की कमी) पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों का आकलन करने के लिए नैदानिक व विश्लेषणात्मक अध्ययन किए जा रहे हैं।

दौरे के दौरान मीडिया दल ने संस्थान की लिपिड केमिस्ट्री व खाद्य विश्लेषण प्रयोगशालाओं का मुआयना किया और वैज्ञानिकों से संवाद किया। दौरे के सांस्कृतिक चरण में प्रतिनिधिमंडल ने सालारजंग संग्रहालय का भ्रमण किया। पत्रकारों ने यहां हैदराबाद के ऐतिहासिक वैभव, कला और दुर्लभ संग्रहों को करीब से जाना। कलाकृतियों और ऐतिहासिक वस्तुओं के जरिए शहर की समृद्ध विरासत को समझने का अवसर मिला।

आयोडीन युक्त पांच ग्राम नमक पर्याप्त

तकनीकी सत्र में पोषण सूचना एवं स्वास्थ्य शिक्षा प्रभाग के प्रमुख डॉ.सुब्बाराव एम.गवरपुर ने बताया कि देश में तेजी से सेंधा नमक, पिंक नमक, रॉक सॉल्ट के नाम से नमक बिक रहा है। उन्होंने कहा कि सभी तरह के नमक में करीब 95 प्रतिशत सोडियम होता है। आयोडीन युक्त नमक ही सही है, बशर्ते एक दिन में पांच ग्राम से अधिक इसका सेवन न हो। इसी प्रकार, शक्कर, गुड या चीनी में कोई अंतर नहीं है, बस इसकी मात्रा चार से पांच टी-स्पून प्रतिदिन ही होनी चाहिए। उन्होंने रोजाना 2000 कैलोरी की थाली की जानकारी भी दी, जिसमें सब्जी, फल, दाल, अन्न आदि शामिल किए गए हैं, जो स्वस्थ आहार की श्रेणी में आते हैं।

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रोजाना 7500 से 8500 स्टेप पर्याप्त

स्वस्थ जीवनशैली के लिए डॉ. सुब्बाराव ने बताया कि रोजाना 7500 से 8500 स्टेप चलना पर्याप्त है। देश में विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रही विटामिन-डी की कमीं दूर करने के लिए उन्होंने शरीर का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा खोलकर दिन की चुभने वाली धूप में 20 से 25 मिनट रहना जरूरी बताया। उन्होंने विटामिन बी-12 के लिए नोन वेज को अहम बताया। इसके अलावा दूध और अंडा का सेवन भी स्वास्थ्य के लिए बेहद कारगर है।

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