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हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में नदी किनारे की भूमि आवंटन पर लगाई रोक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 23 Aug 2018 09:30 AM IST
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नैनीताल हाईकोर्ट
- फोटो : PTI
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हाईकोर्ट ने प्रदेश में नदियों के किनारे भूमि आवंटित करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने पूर्व के ऐसे सभी भूमि आवंटन के मामलों की जांच कर तीन माह में रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में पेश करने और इसके बाद अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर बेदखली की कार्रवाई छह सप्ताह में करने के आदेश दिए हैं।
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कोर्ट के इस आदेश से नदियों के किनारे खेती के नाम पर की गई कई अनियमितताएं भी खुलकर सामने आ सकती हैं। कोर्ट के इस आदेश का देहरादून, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले में अधिक प्रभाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्रों में भी इस तरह के मामले हैं।
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देहरादून निवासी पवन कुमार ने जनहित याचिका दायर कर जमींदारी विनाश भूमि अधिनियम की धारा 132-ए के तहत नदी किनारे की जमीन के आवंटन पर सवाल उठाया था। यह वो जमीन है, जो सामान्य रूप से नदी के बाढ़ क्षेत्र की है और नदी किनारे सिंघाड़ा, तरबूज आदि उगाने, चरागाह और पोखर आदि के उपयोग में लाई जाती है।
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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार की खंडपीठ ने राजस्व सचिव को धारा 132-ए के उल्लंघन मामलों में कमेटी बनाकर तीन माह में जांच करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दस सप्ताह में पेश करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार यह भी सुनिश्चित करे कि भविष्य में नदियों के किनारे की भूमि का आवंटन न हो।
याची का कहना था कि धारा 132-ए की जमीन को सरकार ने कई अन्य प्रयोजनों के लिए भी आवंटित किया है। कोर्ट में सरकार ने कहा कि इस तरह की भूमि कहीं भी आवंटित नहीं की गई है। जहां इस तरह के मामले सामने आए भी हैं, वे निरस्त किए जा चुके हैं। प्रदेश में इस तरह की भूमि मैदानी जिलों में अधिक है।