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चिराग तले अंधेराः कहने को राजधानी, जिले में 150 से ज्यादा गांव गरीब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 12 Apr 2018 01:08 PM IST
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खतरे की जद में आया कुंवारी गांव।
- फोटो : अमर उजाला
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कहने के लिए देहरादून राजधानी है, लेकिन जिले में 150 से ज्यादा ऐसे गांव हैं, जिन्हें पिछड़े या गरीब की श्रेणी में रखा गया है।ऐसे गांवों में कहीं न बाजार हैं न पोस्ट आफिस न स्वास्थ्य केंद्र। कुल मिलाकर यहां हालात चिराग तले अंधेरे वाले हैं।
प्रदेश सरकार ने जिन ढाई हजार गांवों को गरीबी से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया है, उनमें देहरादून जिले के ये 150 गांवों भी शामिल हैं। पहाड़ की तुलना में सुगम और सुविधाजनक माने जाने वाले हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद में भी ऐसे गांवों की संख्या क्रमशः 88 और 105 है।
बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही 1374 ग्राम पंचायतों के इन 2551 गांवों में से 994 बैंक नहीं हैं। 1052 गांवों में एटीएम की सुविधा नहीं है। 839 गांवों को स्वास्थ्य केंद्र खुलने का इंतजार है। 936 गांवों में बाजार नहीं हैं। 757 गांवों में पोस्ट आफिस तक नहीं है जबकि 996 गांवों में इंटरनेट की सुविधा का अभाव है। प्रदेश सरकार ने इन गांवों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए 1000 दिन का लक्ष्य तय किया है। संबंधित विभागों को लक्ष्य हासिल करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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प्रदेश सरकार ने जिन ढाई हजार गांवों को गरीबी से मुक्त कराने का बीड़ा उठाया है, उनमें देहरादून जिले के ये 150 गांवों भी शामिल हैं। पहाड़ की तुलना में सुगम और सुविधाजनक माने जाने वाले हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जनपद में भी ऐसे गांवों की संख्या क्रमशः 88 और 105 है।
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बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रही 1374 ग्राम पंचायतों के इन 2551 गांवों में से 994 बैंक नहीं हैं। 1052 गांवों में एटीएम की सुविधा नहीं है। 839 गांवों को स्वास्थ्य केंद्र खुलने का इंतजार है। 936 गांवों में बाजार नहीं हैं। 757 गांवों में पोस्ट आफिस तक नहीं है जबकि 996 गांवों में इंटरनेट की सुविधा का अभाव है। प्रदेश सरकार ने इन गांवों को सुविधा संपन्न बनाने के लिए 1000 दिन का लक्ष्य तय किया है। संबंधित विभागों को लक्ष्य हासिल करने के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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