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अब यातायात नियम तोड़ने पर दो साल की कैद
Updated Fri, 06 Jul 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ देहरादून।
यातायात नियमों के उल्लंघन पर अब सिर्फ चालान भरने से पीछा नहीं छूटेगा। नई व्यवस्था के तहत कई मामलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे, जिनमें दो साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस बाबत परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन ने आदेश जारी किए हैं।
परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन के अनुसार सरकार ने 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य है। इसके लिए यातायात के कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। इसके लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। कई धाराओं में अधिकतम दो साल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है।
कुल पांच तरह के अपराधिक प्रावधान
शराब पीकर वाहन चलाना, ट्रैफिक लाइट जंप करना, ओवर स्पीड, ओवरलोडिंग और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना। इन सभी मामलों में ज्यादातर घातक दुर्घटनाएं होती हैं।
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धाराएं और सजा का प्रावधान
आईपीसी की धारा-279 : सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना।
अपराध की प्रकृति- यह संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।
सजा-छह मास का कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों।
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आईपीसी की धारा-336 : ऐसा कृत्य जिससे किसी व्यक्ति का जीवन या वैयक्तिक सुरक्षा संकट में आए।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।
सजा-तीन माह का कारावास या 250 रुपये जुर्माना या दोनों।
---
आईपीसी की धारा-337 : किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में आए।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है।
सजा-छह माह कारावास या 500 रुपये जुर्माना या दोनों।
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आईपीसी की धारा-338 : ऐसा कार्य करना जिससे किसी को गंभीर चोट पहुंच सकती हो या पहुंचे।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है।
सजा-दो वर्ष कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों।
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यातायात नियमों के उल्लंघन पर अब सिर्फ चालान भरने से पीछा नहीं छूटेगा। नई व्यवस्था के तहत कई मामलों में आपराधिक मुकदमे दर्ज होंगे, जिनमें दो साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है। इस बाबत परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन ने आदेश जारी किए हैं।
परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन के अनुसार सरकार ने 2020 तक सड़क दुर्घटनाओं में 50 फीसदी की कमी लाने का लक्ष्य है। इसके लिए यातायात के कुछ नियमों में बदलाव किया गया है। इसके लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का प्रावधान किया गया है। कई धाराओं में अधिकतम दो साल की सजा और जुर्माने का भी प्रावधान है।
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कुल पांच तरह के अपराधिक प्रावधान
शराब पीकर वाहन चलाना, ट्रैफिक लाइट जंप करना, ओवर स्पीड, ओवरलोडिंग और वाहन चलाते समय मोबाइल पर बात करना। इन सभी मामलों में ज्यादातर घातक दुर्घटनाएं होती हैं।
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धाराएं और सजा का प्रावधान
आईपीसी की धारा-279 : सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से वाहन चलाना।
अपराध की प्रकृति- यह संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।
सजा-छह मास का कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों।
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आईपीसी की धारा-336 : ऐसा कृत्य जिससे किसी व्यक्ति का जीवन या वैयक्तिक सुरक्षा संकट में आए।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। यह अपराध समझौते योग्य नहीं है।
सजा-तीन माह का कारावास या 250 रुपये जुर्माना या दोनों।
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आईपीसी की धारा-337 : किसी कार्य द्वारा, जिससे मानव जीवन या किसी की व्यक्तिगत सुरक्षा खतरे में आए।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है।
सजा-छह माह कारावास या 500 रुपये जुर्माना या दोनों।
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आईपीसी की धारा-338 : ऐसा कार्य करना जिससे किसी को गंभीर चोट पहुंच सकती हो या पहुंचे।
अपराध की प्रकृति- यह एक संज्ञेय अपराध और जमानती है। हालांकि, यदि किसी को चोट पहुंचती है तो इस अपराध में पीड़ित द्वारा ही समझौता किया जा सकता है।
सजा-दो वर्ष कारावास या एक हजार रुपये जुर्माना या दोनों।