{"_id":"5ada53684f1c1b84098b5a83","slug":"31524257640-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"संपति कब्जाने वाले अधिकारियों और नौकरों पर मुकदमा","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
संपति कब्जाने वाले अधिकारियों और नौकरों पर मुकदमा
Updated Sat, 21 Apr 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
मालिक की मौत के बाद राजस्व अधिकारियों के साथ उसकी करोड़ों रुपये की संपत्ति कब्जाने वाले नौकरों के खिलाफ कैंट पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। सीजेएम कोर्ट ने मामले में तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल और नौकरों को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
इसी वर्ष 12 फरवरी को कौलागढ़ निवासी बद्री प्रसाद ने सीजेएम कोर्ट में शिकायत दायर की थी। उन्होंने बताया कि सूरजभान उनके पिता और श्यामलाल चाचा थे। उनकी मौत 1972 से 75 के दौरान हो गई। इसी दौरान सूरजभान ने घरेलू काम के लिए एक महिला पार्वती देवी और युवक भगत सिंह को नौकरी पर रख लिया। सूरजभान की मौत के बाद पार्वती देवी ने खुद को पत्नी दर्शाते हुए राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवा लिया। वहीं, भगत सिंह ने खुद को पुत्र का नाम पुत्र के रूप में दर्ज करवा दिया।
इस फर्जीवाडे़ में कानूनगो हीरा सिंह बिष्ट और लेखपाल प्रवीण सिंह रावत ने उनका साथ दिया। मामले की जांच तहसीलदार मुकेश चंद रमोला का सौंपी गई। तहसीलदार की आरोपियों के सांठगांठ के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। थाना प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि तहरीर के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मालिक की मौत के बाद राजस्व अधिकारियों के साथ उसकी करोड़ों रुपये की संपत्ति कब्जाने वाले नौकरों के खिलाफ कैंट पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। सीजेएम कोर्ट ने मामले में तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल और नौकरों को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे।
इसी वर्ष 12 फरवरी को कौलागढ़ निवासी बद्री प्रसाद ने सीजेएम कोर्ट में शिकायत दायर की थी। उन्होंने बताया कि सूरजभान उनके पिता और श्यामलाल चाचा थे। उनकी मौत 1972 से 75 के दौरान हो गई। इसी दौरान सूरजभान ने घरेलू काम के लिए एक महिला पार्वती देवी और युवक भगत सिंह को नौकरी पर रख लिया। सूरजभान की मौत के बाद पार्वती देवी ने खुद को पत्नी दर्शाते हुए राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करवा लिया। वहीं, भगत सिंह ने खुद को पुत्र का नाम पुत्र के रूप में दर्ज करवा दिया।
विज्ञापन
इस फर्जीवाडे़ में कानूनगो हीरा सिंह बिष्ट और लेखपाल प्रवीण सिंह रावत ने उनका साथ दिया। मामले की जांच तहसीलदार मुकेश चंद रमोला का सौंपी गई। तहसीलदार की आरोपियों के सांठगांठ के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई। बृहस्पतिवार को सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए थे। थाना प्रभारी शंकर सिंह बिष्ट ने बताया कि तहरीर के आधार पर सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
विज्ञापन