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आज भी अख्तर के पेट में है चंद्रशेखर का ‘पाप’
Updated Wed, 28 Mar 2018 02:24 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर बार-बार टोके जाने और सजा से नाराज आईटीबीपी जवान चंद्रशेखर ने दारोगा सुरेंद्र लाल की हत्या करने के साथ ही साथी जवान अख्तर अली पर भी जानलेवा हमला किया था। चंद्रशेखर ने अख्तर अली को तीन गोलियां मारी थीं, जिनमें से एक गोली आज भी उसके पेट में ही है।
एडीजे तृतीय की कोर्ट में मंगलवार को जिस वक्त चंद्रशेखर को सजा सुनाई गई, उस वक्त अख्तर अली भी वहीं मौजूद थे। उन्होंने बताया कि किसी को अंदेशा नहीं था कि चंद्रशेखर इतना खतरनाक कदम उठाएगा। अख्तर अली ने न्यायालय को बताया कि ड्यूटी के बाद जब दारोगा सुरेंद्र लाल और अख्तर अली समेत अन्य जवान आराम कर रहे थे, तभी चंद्रशेखर वहां पहुंचा और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। अख्तर अली को तीन गोलियां लगी। उपचार के बाद दो गोलियां उनके शरीर से निकाल ली गईं, लेकिन एक गोली आज भी पेट में धंसी है। बता दें दारोगा सुरेंद्र लाल की मौत हो गई थी।
मोबाइल बना था गोलीकांड की वजह
2015 में गोलीकांड के बाद जब पुलिस जांच के लिए अकादमी पहुंची तो चंद्रशेखर और मृतक दारोगा सुरेंद्र लाल के बीच मोबाइल को लेकर हुए विवाद की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि गारद कमांडर ने ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करने पर उसे डांटा था। अगले दिन भी जब वह ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करता मिला तो कार्रवाई करते हुए मोबाइल जब्त कर लिया गया। अगले दिन फिर मोबाइल इस्तेमाल पर उसे पिट्ठू की सजा दी गई। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ।
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कोर्ट में कांपता रहा चंद्रशेखर
सजा सुनाए जाते वक्त चंद्रशेखर का चेहरा सफेद हो गया था और वह कांप रहा था। ज्यादातर समय वह सिर झुकाए खड़ा रहा। फैसला सुनाने से पहले उसने कहा कि गोली गलती से चली थी। वह किसी की जान नहीं लेना चाहता था। दारोगा सुरेंद्र लाल से उसका विवाद हुआ था, इसी दौरान हाथापाई में गोली चल गई।
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मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर बार-बार टोके जाने और सजा से नाराज आईटीबीपी जवान चंद्रशेखर ने दारोगा सुरेंद्र लाल की हत्या करने के साथ ही साथी जवान अख्तर अली पर भी जानलेवा हमला किया था। चंद्रशेखर ने अख्तर अली को तीन गोलियां मारी थीं, जिनमें से एक गोली आज भी उसके पेट में ही है।
एडीजे तृतीय की कोर्ट में मंगलवार को जिस वक्त चंद्रशेखर को सजा सुनाई गई, उस वक्त अख्तर अली भी वहीं मौजूद थे। उन्होंने बताया कि किसी को अंदेशा नहीं था कि चंद्रशेखर इतना खतरनाक कदम उठाएगा। अख्तर अली ने न्यायालय को बताया कि ड्यूटी के बाद जब दारोगा सुरेंद्र लाल और अख्तर अली समेत अन्य जवान आराम कर रहे थे, तभी चंद्रशेखर वहां पहुंचा और ताबड़तोड़ गोलियां चलाई। अख्तर अली को तीन गोलियां लगी। उपचार के बाद दो गोलियां उनके शरीर से निकाल ली गईं, लेकिन एक गोली आज भी पेट में धंसी है। बता दें दारोगा सुरेंद्र लाल की मौत हो गई थी।
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मोबाइल बना था गोलीकांड की वजह
2015 में गोलीकांड के बाद जब पुलिस जांच के लिए अकादमी पहुंची तो चंद्रशेखर और मृतक दारोगा सुरेंद्र लाल के बीच मोबाइल को लेकर हुए विवाद की जानकारी सामने आई थी। जांच में पता चला कि गारद कमांडर ने ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करने पर उसे डांटा था। अगले दिन भी जब वह ड्यूटी के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल करता मिला तो कार्रवाई करते हुए मोबाइल जब्त कर लिया गया। अगले दिन फिर मोबाइल इस्तेमाल पर उसे पिट्ठू की सजा दी गई। इसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद भी हुआ।
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कोर्ट में कांपता रहा चंद्रशेखर
सजा सुनाए जाते वक्त चंद्रशेखर का चेहरा सफेद हो गया था और वह कांप रहा था। ज्यादातर समय वह सिर झुकाए खड़ा रहा। फैसला सुनाने से पहले उसने कहा कि गोली गलती से चली थी। वह किसी की जान नहीं लेना चाहता था। दारोगा सुरेंद्र लाल से उसका विवाद हुआ था, इसी दौरान हाथापाई में गोली चल गई।