उत्तराखंड: हाथी और साइकिल के साथ ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, सामने आया डिंपल यादव का कनेक्शन
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उत्तराखंड में सपा-बसपा के गठबंधन ने कांग्रेस के लिए दो लोकसभा सीटों पर खतरे की घंटी बजा दी है। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट पर वोटों का बिखराव रोकने के लिए कांग्रेस को अब जमकर मशक्कत करनी पडे़गी। इन दोनों ही सीटों पर अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति के मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
उत्तराखंड की सियासी स्थिति देखें, तो भले ही सपा-बसपा मजबूत नहीं दिखते, लेकिन चुनावी इतिहास टटोलने में दोनों दलों के पास उपलब्धि बताने लायक तथ्य जरूर मौजूद हैं। ये स्थिति कांग्रेस की नींद हराम कर सकती है। एक-एक सीट पर तयशुदा माने जा रहे घमासान के बीच इस स्थिति में भाजपा जरूर थोड़ा मुस्कुरा सकती है।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद यह पहला मौका है, जब किसी चुनाव में सपा और बसपा गठबंधन के रूप में सामने होंगे। सीटों के बंटवारे में पौड़ी लोकसभा सीट सपा के खाते में गई है, जबकि टिहरी, हरिद्वार, नैनीताल और अल्मोड़ा सीट पर बसपा के उम्मीदवार खम ठोंकेगे। पौड़ी लोकसभा सीट सपा के हिस्से में जाने के पीछे राजनीतिक विश्लेषक एक बड़ी वजह गढ़वाल क्षेत्र में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ससुराल को मानकर चल रहे हैं।
अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल गढ़वाल क्षेत्र की ही रहने वाली हैं। ऐसे में चुनाव के दौरान सपा इस बात का लाभ लेने की कोशिश करेगी। वहीं, बसपा का शुरू से ही हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में खास प्रभाव माना जाता रहा है। ऊधमसिंह नगर जिला नैनीताल लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है।
बसपा को जिले बनाने का श्रेय, हरक रह चुके साथ
बसपा को उत्तराखंड में नए जिले बनाने का श्रेय हासिल है। राज्य गठन से पहले यूपी की सीएम रहते हुए मायावती ने रुद्रप्रयाग, ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों का निर्माण किया था। नब्बे के दशक में वर्तमान कैबिनेट मंत्री डॉ.हरक सिंह रावत बसपा के साथ रहे हैं।
भाजपा छोड़ने के बाद कुछ समय रावत ने अपना संगठन खड़ा किया था, लेकिन बाद में वह बसपा से जुड़ गए थे। हालांकि कुछ समय बाद उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था।
पहली बार सपा-बसपा उत्तराखंड में साथ मिलकर चुनाव लडे़ंगे। बसपा ने नए जिलों से लेकर अन्य कई मामलों में उत्तराखंड की बेहतरी के लिए काम किया है। इस बार के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों का गठबंधन कांग्रेस-भाजपा के खिलाफ एक मजबूत विकल्प के तौर पर सामने होगा। हमें इससे लाभ मिलेगा।
-कुलदीप बालियान, प्रदेश अध्यक्ष, बसपा
सपा-बसपा गठबंधन का कांग्रेस अपने लिए कोई नुकसान नहीं देखती। उत्तराखंड की राजनीति अब इस कदर परिपक्व हो चुकी है कि वह सीधी लड़ाई पर भरोसा करती है। कांग्रेस और भाजपा के बीच ही चुनाव में मुकाबला होगा। अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति के वोटर भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को ही चुनेंगे।
-सूर्यकांत धस्माना, प्रदेश उपाध्यक्ष, कांग्रेस