" जवानी के दिनों में लोग मुझे किताब वाला आदमी कहने लगे थे...बस स्टॉप, बाजार, रेलवे स्टेशन, घर-दफ्तर जहाँ कहीं भी मेरे पास कुछ मिनट का समय होता, मैं अपने बैग से किताब निकाल कर पढ़ने लगता। आज भी अखबार पढ़ने में दो घंटे लगाता हूँ। हर रोज कम से कम 8 घंटे मैं लेखन में व्यतीत करता हूँ।"
यह कहना है देहरादून के प्रतिष्ठित बुजुर्ग लेखक राज कंवर का। उम्र के 92वें साल की दहलीज पर खड़े राज कंवर इतवार को वैली ऑफ वर्ड्स कैफ़े के 'लेखक से मिलिए' कार्यक्रम में मौजूद थे और सबको अपना दिल खोल कर दिखा रहे थे। उनको सुनने पहुंचे अपने कद्रदानों को उन्होंने लेखन का एक मूलमंत्र भी दिया। उन्होंने कहा कि , ' रीडिंग करने वाले सारे लोग राइटर नहीं होते, लेकिन हरेक राइटर यकीनन रीडिंग करनेवाला शख्स होता है। जब तक पढ़ने का जुनून न हो, लिखने का हुनर नहीं आता।'
उन्होंने कहा कि इन दिनों भी वह रीडिंग को भरपूर वक़्त देने की कोशिश करते हैं। सुबह 2 घंटे अखबार पढ़ते हैं। रात को 2 घंटे चुनिंदा किताबों का अध्ययन करते हैं। रात्रि 10 बजे तक सो जाते हैं और सुबह 6 बजे उठ जाते हैं। कुल मिलाकर 24 में से 12 घंटे लिखने और पढ़ने को समर्पित करते हैं।