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संत समाज की सरकार को चुनौती, शंकराचार्य के शिष्य को कुछ हुआ तो भुगतोगे...

Thu, 08 Jun 2017 03:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला,हरिद्वार Updated Thu, 08 Jun 2017 03:05 PM IST
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Avimuktavwaranand Saraswati matter saints given warning to government
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती

जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती इन दिनों ज्योर्तिमठ में अनशन पर बैठे हैं। उत्तराखंड सरकार ने पूर्णागिरी के प्राचीन मंदिर में उनका प्रवेश रोक दिया है। शंकराचार्य मठ ने आग्रह किया है कि हरिद्वार सहित सभी तीर्थों के साधु संत और अखाड़े शंकराचार्य और उनके शिष्य के साथ खड़े हों। 

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गौरतलब है कि शारदा और ज्योर्ति पीठाधीश्वर स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती प्रति वर्ष पूर्णागिरी के मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करते हैं। पूर्णागिरी की स्थापना स्वरूपानंद सरस्वती के गुरु शंकराचार्य ब्रह्मानंद सरस्वती ने की थी।
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इस बार जब उनके शिष्यों ने मंदिर में प्रवेश किया तो स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधकों ने मंदिर पर ताला डाला दिया। शंकराचार्य मठ कनखल की ओर से जारी बयान के अनुसार इस मंदिर का संचालन ज्योर्तिपीठ के शंकराचार्य द्वारा कराया जाता रहा। यह पीठ आम हिंदू के लिए दर्शनार्थ खुली हुई है।

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संत बोले, 'समूचा हिंदू समाज आंदोलन प्रारंभ कर देगा'

Avimuktavwaranand Saraswati matter saints given warning to government
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

ज्योर्ति पीठ की यह अधिष्ठात्री देवी भी है। हाल ही में जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद एवं शंकराचार्य के अन्य शिष्यों ने मंदिर में प्रवेश करना चाहा तो वहां के स्थानीय प्रभारी ने मंदिर में ताला डाल दिया। इसका विरोध करने पर जोशीमठ प्रशासन ने भी प्रभारियों का साथ दिया। इसके विरुद्ध स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विगत दिवस से आमरण अनशन पर बैठे हैं।  
    
शंकराचार्य मठ कनखल ने काशी विद्वत परिषद का भी बयान जारी किया है। बुधवार को हुई विद्वत परिषद की बैठक में आचार्य रामयत्न शुक्ल, आचार्य वशिष्ठ त्रिपाठी, शिवजी उपाध्याय, राम किशोर त्रिपाठी, पंडित रमाकांत पांडेय, डा. शिव प्रकाश मिश्र,  कमलाकांत त्रिपाठी, दिव्य चैतन्य ब्रह्मचारी आदि मौजूद थे।

बैठक में उत्तराखंड प्रशासन के खिलाफ भर्त्सना प्रस्ताव पारित कर मुख्यमंत्री को भेजा गया। मांग की गई है कि जोशीमठ में वैदिक परंपराओं का पालन कराया जाए। सनानत धर्मियों का मंदिर प्रवेश कोई भी नहीं रोक सकता। यदि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जीवन पर संकट आया तो समूचा हिंदू समाज आंदोलन प्रारंभ कर देगा।    

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