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नंदा गई कैलास
Updated Sat, 01 Jul 2017 11:03 PM IST
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नारायणबगड़। विकासखंड के पैतोली गांव के अन्नपूर्णा मठ के नंदा देवी मंदिर में आयोजित नंदादेवी महोत्सव के दूसरे दिन मां नंदा की कैलास विदाई हुई। नंदा को श्रद्धालुओं ने भावुक विदाई दी। रविवार को भंडारे के साथ महोत्सव का समापन किया जाएगा।
शनिवार सुबह पंडित लक्ष्मी प्रसाद सती सहित अन्य ग्रामीणों ने मां नंदा की पूजा-अर्चना की। मां नंदा का ससुराल कैलास माना जाता है। लिहाजा, ग्रामीण मां नंदा को ससुराल के लिए विदा करते हैं। शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिन मां नंदा की डोली का श्रद्धालुओं ने श्रृंगार किया। इसके बाद मंदिर परिसर में देवताओं के पश्वाओं ने देवनृत्य किया। क्षेत्र के प्रसिद्ध जागरी बुद्धि सिंह दानू, दामोदर प्रसाद और अनिल प्रसाद द्वारा मां नंदा के कैलास विदाई जागर गाए गए। इस दौरान श्रद्धालु भावुक भी हुए। क्षेत्र के नारायणबगड़, पालछुनी, पैतोली, सिलकोटी सहित 10 गांवों के ग्रामीण क्षेत्र की खुशहाली के लिए इस महोत्सव का आयोजन हर तीसरे साल करते हैं। शनिवार को महोत्सव में आयोजक गांवों सहित सणकोट, रैगांव, भंगोटा, रैंस, चोपता, चलियापानी सहित उत्तरी कड़ाकोट पट्टी के कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।
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शनिवार सुबह पंडित लक्ष्मी प्रसाद सती सहित अन्य ग्रामीणों ने मां नंदा की पूजा-अर्चना की। मां नंदा का ससुराल कैलास माना जाता है। लिहाजा, ग्रामीण मां नंदा को ससुराल के लिए विदा करते हैं। शुक्रवार से शुरू हुए तीन दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान के दूसरे दिन मां नंदा की डोली का श्रद्धालुओं ने श्रृंगार किया। इसके बाद मंदिर परिसर में देवताओं के पश्वाओं ने देवनृत्य किया। क्षेत्र के प्रसिद्ध जागरी बुद्धि सिंह दानू, दामोदर प्रसाद और अनिल प्रसाद द्वारा मां नंदा के कैलास विदाई जागर गाए गए। इस दौरान श्रद्धालु भावुक भी हुए। क्षेत्र के नारायणबगड़, पालछुनी, पैतोली, सिलकोटी सहित 10 गांवों के ग्रामीण क्षेत्र की खुशहाली के लिए इस महोत्सव का आयोजन हर तीसरे साल करते हैं। शनिवार को महोत्सव में आयोजक गांवों सहित सणकोट, रैगांव, भंगोटा, रैंस, चोपता, चलियापानी सहित उत्तरी कड़ाकोट पट्टी के कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।
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