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गड्ढों में खेलकर हम मेडल कैसे जीतें
Updated Tue, 21 Aug 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
गड्ढों में खेलकर हम कैसे पदक जीत लाएं? यह बड़ा सवाल भी छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान उठाया है। छात्रों ने संस्थान के खेल मैदान को भी जरूरत के हिसाब से बेहद छोटा और गैर सहूलियत वाला बताया है। वर्तमान में खेल मैदान बड़ी-बड़ी घास और पानी भरे गड्ढों से पटा पड़ा है। महीनों से छात्रों ने यहां खेल संबंधी गतिविधियां नहीं की हैं।
एमएसवीएच की वेबसाइट पर खेल का मैदान 4200 वर्गमीटर का दर्शाया गया है। जबकि, मौके पर वह इससे आधे से भी कम है। मैदान में कीचड़ और बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आई है। वर्तमान में खेल के मैदान में निर्माण कार्य भी चल रहा है। यही कारण है कि वहां इस समय छात्र खेल नहीं पा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि खेल के मैदान के अभाव में वे अपनी खेल संबंधी गतिविधियां नहीं कर पाते हैं। छात्रों के मुताबिक, जब यह मैदान पूरी तरह ठीक था, तब यहां से बहुत अच्छे खिलाड़ी निकले हैं। इनमें से कई छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुके हैं। यहां से निकले पंकज राणा वर्तमान में नेत्रहीन फुटबाल टीम के कप्तान हैं। छात्रों का सवाल है कि इस अभाव में वे खेलेंगे तो पदक कैसे लाएंगे। जबकि, खेल में उनसे बेहतर करने का दबाव बनाया जाता है।
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निदेशक ने दी सफाई
खेल के मैदान के संबंध में एनआईईपीवीडी की निदेशक अनुराधा डालमिया का कहना है कि जुलाई से सितंबर के बीच बच्चों को खेलने से मना किया जाता है। इसका कारण है कि यहां बरसात के दिनों में झाड़ियां उग आती हैं। यही नहीं यहां जहरीले सांप भी बहुत रहते हैं। उन्होंने कहा कि सांपों को पकड़ने के लिए वन विभाग को लिखा गया था, मगर विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए सांपों को यहां से हटाने से मना कर दिया। सितंबर के बाद फिर से मैदान की साफ-सफाई की जाती है और खेल की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
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गड्ढों में खेलकर हम कैसे पदक जीत लाएं? यह बड़ा सवाल भी छात्रों ने प्रदर्शन के दौरान उठाया है। छात्रों ने संस्थान के खेल मैदान को भी जरूरत के हिसाब से बेहद छोटा और गैर सहूलियत वाला बताया है। वर्तमान में खेल मैदान बड़ी-बड़ी घास और पानी भरे गड्ढों से पटा पड़ा है। महीनों से छात्रों ने यहां खेल संबंधी गतिविधियां नहीं की हैं।
एमएसवीएच की वेबसाइट पर खेल का मैदान 4200 वर्गमीटर का दर्शाया गया है। जबकि, मौके पर वह इससे आधे से भी कम है। मैदान में कीचड़ और बड़ी-बड़ी झाड़ियां और घास उग आई है। वर्तमान में खेल के मैदान में निर्माण कार्य भी चल रहा है। यही कारण है कि वहां इस समय छात्र खेल नहीं पा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि खेल के मैदान के अभाव में वे अपनी खेल संबंधी गतिविधियां नहीं कर पाते हैं। छात्रों के मुताबिक, जब यह मैदान पूरी तरह ठीक था, तब यहां से बहुत अच्छे खिलाड़ी निकले हैं। इनमें से कई छात्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुके हैं। यहां से निकले पंकज राणा वर्तमान में नेत्रहीन फुटबाल टीम के कप्तान हैं। छात्रों का सवाल है कि इस अभाव में वे खेलेंगे तो पदक कैसे लाएंगे। जबकि, खेल में उनसे बेहतर करने का दबाव बनाया जाता है।
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निदेशक ने दी सफाई
खेल के मैदान के संबंध में एनआईईपीवीडी की निदेशक अनुराधा डालमिया का कहना है कि जुलाई से सितंबर के बीच बच्चों को खेलने से मना किया जाता है। इसका कारण है कि यहां बरसात के दिनों में झाड़ियां उग आती हैं। यही नहीं यहां जहरीले सांप भी बहुत रहते हैं। उन्होंने कहा कि सांपों को पकड़ने के लिए वन विभाग को लिखा गया था, मगर विभाग ने नियमों का हवाला देते हुए सांपों को यहां से हटाने से मना कर दिया। सितंबर के बाद फिर से मैदान की साफ-सफाई की जाती है और खेल की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं।
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