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आज से कार्य बहिष्कार पर रहेंगे रोडवेजकर्मी
Updated Tue, 07 Aug 2018 02:28 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
परिवहन निगम कर्मियों की हड़ताल पर आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लगने के बावजूद रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े 4200 से अधिक कर्मचारी आज से कार्य बहिष्कार पर जा रहे हैं। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताल नहीं कर रहे हैं, केवल कार्यबहिष्कार पर करेंगे। उन्होंने बताया कि यह निर्णय सोमवार को उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक के साथ वार्ता विफल होने के बाद लिया गया है। वहीं, रोडवेजकर्मियों के कार्य बहिष्कार के चलते आज बसों के संचालन के साथ ही कार्यशाला और कार्यालयों का कामकाज भी प्रभावित रहेगा।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने बताया कि कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रबंध निदेशक बीके संत से मुलाकात की। इस दौरान नौ सूत्री मांगों पर सहमति नहीं बनने के चलते वार्ता विफल हो गई। इसके बाद रोडवेज कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान शासन पर बकाया 35 करोड़ की धनराशि का भुगतान, बसों का बेड़ा बढ़ाकर दो हजार करने, 2013 में सेवानिवृत्त हुए कार्मिकों का भुगतान करने आदि की मांगें रखी गईं, जिन पर सहमति नहीं बन पाई। इसके विरोध में कर्मचारी मंगलवार से कार्यबहिष्कार पर रहेंगे। कहा कि यह निर्णय हमें मजबूरी में उठाना पड़ रहा है। बता दें कि परिवहन सचिव शैलेश बगौली ने परिवहन निगम कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लागू करने के आदेश जारी किए थे, जो छह अगस्त से प्रभावी हो गया है। वार्ता में निगम की ओर से वित्त नियंत्रक पंकज तिवाड़ी, महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन आदि उपस्थित थे। वहीं, संगठन की ओर से महेंद्र सिंह जीना, दिनेश गोसाईं, विपिन बिजल्वाण, प्रेमसिंह रावत, विक्रम मौजूद रहे।
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संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर निकाला जाएगा मशाल जुलूस
देहरादून। उत्तराखंड शिक्षक कार्मिक एवं आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार की शाम परेड ग्राउंड से सचिवालय तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्र अध्यक्ष रविनंदन कुमार ने सोमवार को यह एलान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन गढ़वाल मंडल के देहरादून क्षेत्र के सभी पदाधिकारी व कर्मचारी मंगलवार शाम गांधी पार्क में एकत्र होंगे। इसके बाद परेड ग्राउंड से सचिवालय तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने हरिद्वार, रुड़की, कोटद्वार और ऋषिकेश डिपो के शाखा अध्यक्ष, मंत्रियों को जिला संयोजकों से संपर्क कर अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में हिस्सा लेने को कहा। उन्होंने कहा कि मौसम खराब रहा तब भी मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
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क्या है एस्मा
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाई जाती है। यह अधिकतम छह महीने के लिए लगाई जाती है। इसे अनिवार्य सेवाएं बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है। जिस सेवा पर एस्मा लगता है, उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते हैं। अन्यथा हड़तालियों को छह माह तक की कैद, दंड या दोनों का प्रावधान है।
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सामूहिक कार्य बहिष्कार हड़ताल की श्रेणी में आता है। यह एस्मा का उल्लंघन है। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
-बीके संत, प्रबंध निदेशक रोडवेज
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यूनियन की प्रमुख मांगें
- हर महीने की पहली तारीख को कर्मचारियों को वेतन दिया जाए।
- मंडलीय डिपो, कार्यशालाओं में आउटसोर्स तकनीकी कर्मचारियों का पदनाम (दैनिक वेतनभोगी, संविदा, अंशकालिक, तदर्थ, वर्कचार्ज) किया जाए।
- कार्यशाला में आउटसोर्स कर्मचारियों प्रत्येक माह 20 एवं 22 दिन कार्य करने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को वेतन में शामिल कर भुगतान किया जाए। साथ ही अवकाश अनुमन्य किया जाए।
- आउटसोर्स परिचालकों का किलोमीटर दरों का भुगतान आउटसोर्स के चालकों के समान ही किया जाए।
- एक जनवरी 2016 से लागू सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान एवं लंबित देयकों का भुगतान किया जाए।
- प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत कार्यालय सहायकों को केंद्र प्रभारी के पदों पर परिवर्तित किया जाए।
- नियमित कर्मचारियों की तरह आउटसोर्स चालक, परिचालक एवं कार्मिकों का भी महंगाई भत्ता बढ़ाया जाए।
- विशेष श्रेणी/संविदा चालक-परिचालकों और तकनीकी कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय एवं वेतन 18 हजार रुपये दिया जाए।
- 424 संविदा परिचालकों को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।
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परिवहन निगम कर्मियों की हड़ताल पर आवश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लगने के बावजूद रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद से जुड़े 4200 से अधिक कर्मचारी आज से कार्य बहिष्कार पर जा रहे हैं। परिषद के पदाधिकारियों का कहना है कि वे हड़ताल नहीं कर रहे हैं, केवल कार्यबहिष्कार पर करेंगे। उन्होंने बताया कि यह निर्णय सोमवार को उत्तराखंड परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक के साथ वार्ता विफल होने के बाद लिया गया है। वहीं, रोडवेजकर्मियों के कार्य बहिष्कार के चलते आज बसों के संचालन के साथ ही कार्यशाला और कार्यालयों का कामकाज भी प्रभावित रहेगा।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री रामचंद्र रतूड़ी ने बताया कि कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को प्रबंध निदेशक बीके संत से मुलाकात की। इस दौरान नौ सूत्री मांगों पर सहमति नहीं बनने के चलते वार्ता विफल हो गई। इसके बाद रोडवेज कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान शासन पर बकाया 35 करोड़ की धनराशि का भुगतान, बसों का बेड़ा बढ़ाकर दो हजार करने, 2013 में सेवानिवृत्त हुए कार्मिकों का भुगतान करने आदि की मांगें रखी गईं, जिन पर सहमति नहीं बन पाई। इसके विरोध में कर्मचारी मंगलवार से कार्यबहिष्कार पर रहेंगे। कहा कि यह निर्णय हमें मजबूरी में उठाना पड़ रहा है। बता दें कि परिवहन सचिव शैलेश बगौली ने परिवहन निगम कर्मियों की हड़ताल पर एस्मा लागू करने के आदेश जारी किए थे, जो छह अगस्त से प्रभावी हो गया है। वार्ता में निगम की ओर से वित्त नियंत्रक पंकज तिवाड़ी, महाप्रबंधक संचालन दीपक जैन आदि उपस्थित थे। वहीं, संगठन की ओर से महेंद्र सिंह जीना, दिनेश गोसाईं, विपिन बिजल्वाण, प्रेमसिंह रावत, विक्रम मौजूद रहे।
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संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर निकाला जाएगा मशाल जुलूस
देहरादून। उत्तराखंड शिक्षक कार्मिक एवं आउटसोर्स संयुक्त मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार की शाम परेड ग्राउंड से सचिवालय तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन के क्षेत्र अध्यक्ष रविनंदन कुमार ने सोमवार को यह एलान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड रोडवेज इंप्लाइज यूनियन गढ़वाल मंडल के देहरादून क्षेत्र के सभी पदाधिकारी व कर्मचारी मंगलवार शाम गांधी पार्क में एकत्र होंगे। इसके बाद परेड ग्राउंड से सचिवालय तक मशाल जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने हरिद्वार, रुड़की, कोटद्वार और ऋषिकेश डिपो के शाखा अध्यक्ष, मंत्रियों को जिला संयोजकों से संपर्क कर अधिक से अधिक संख्या में जुलूस में हिस्सा लेने को कहा। उन्होंने कहा कि मौसम खराब रहा तब भी मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
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क्या है एस्मा
आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) हड़ताल को रोकने के लिए लगाई जाती है। यह अधिकतम छह महीने के लिए लगाई जाती है। इसे अनिवार्य सेवाएं बनाए रखने के लिए लागू किया जाता है। जिस सेवा पर एस्मा लगता है, उससे संबंधित कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकते हैं। अन्यथा हड़तालियों को छह माह तक की कैद, दंड या दोनों का प्रावधान है।
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सामूहिक कार्य बहिष्कार हड़ताल की श्रेणी में आता है। यह एस्मा का उल्लंघन है। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी।
-बीके संत, प्रबंध निदेशक रोडवेज
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यूनियन की प्रमुख मांगें
- हर महीने की पहली तारीख को कर्मचारियों को वेतन दिया जाए।
- मंडलीय डिपो, कार्यशालाओं में आउटसोर्स तकनीकी कर्मचारियों का पदनाम (दैनिक वेतनभोगी, संविदा, अंशकालिक, तदर्थ, वर्कचार्ज) किया जाए।
- कार्यशाला में आउटसोर्स कर्मचारियों प्रत्येक माह 20 एवं 22 दिन कार्य करने पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि को वेतन में शामिल कर भुगतान किया जाए। साथ ही अवकाश अनुमन्य किया जाए।
- आउटसोर्स परिचालकों का किलोमीटर दरों का भुगतान आउटसोर्स के चालकों के समान ही किया जाए।
- एक जनवरी 2016 से लागू सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान एवं लंबित देयकों का भुगतान किया जाए।
- प्रशासनिक कार्यालयों में कार्यरत कार्यालय सहायकों को केंद्र प्रभारी के पदों पर परिवर्तित किया जाए।
- नियमित कर्मचारियों की तरह आउटसोर्स चालक, परिचालक एवं कार्मिकों का भी महंगाई भत्ता बढ़ाया जाए।
- विशेष श्रेणी/संविदा चालक-परिचालकों और तकनीकी कर्मचारियों का न्यूनतम मानदेय एवं वेतन 18 हजार रुपये दिया जाए।
- 424 संविदा परिचालकों को नियुक्ति पत्र जारी किया जाए।