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बिना चिकित्सक डेंगू और कांवड़ की तैयारी,
Updated Mon, 03 Jul 2017 10:39 PM IST
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रुड़की।
प्रशासन की ओर से बिना चिकित्सक के डेंगू से बचाव और कांवड़ यात्रा की तैयारी की जा रही है। स्थिति यह है कि रुड़की सिविल अस्पताल की अधिकांश ओपीडी खाली पड़ी हैं, जिससे आए दिन मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह हाल तब है जबकि इसी सप्ताह से कांवड़ यात्रा शुरू होनी है। वहीं, बरसात के साथ ही डेंगू और मलेरिया का भी खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से डेंगू की रोकथाम के लिए आवश्यक एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पिछले साल बरसात में डेंगू के कारण शहर से देहात तक कई लोगों को जान गंवानी पड़ी था। वहीं, डेढ़ हजार से अधिक मरीज सिविल अस्पताल पहुंचे थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग नहीं चेता है। स्थिति यह है कि सिविल अस्पताल चिकित्सकों से लगभग खाली हो चुका है। सीएमएस समेत छह चिकित्सकों के स्थानांतरण से यहां ओपीडी में भी मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को भी गिनेचुने चिकित्सक ही ओपीडी में रहे, जिससे मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं महिला चिकित्सक नहीं होने से लेबर रूम और महिला ओपीडी नर्सों के भरोसे संचालित की गई। पिछले कई दिनों से चल रहे चिकित्सकों के संकट के बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुध नहीं ली जा रही है, जबकि कांवड़ का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। साथ ही बरसात के कारण डेंगू, मलेरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि चिकित्सकों की समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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प्रशासन की ओर से बिना चिकित्सक के डेंगू से बचाव और कांवड़ यात्रा की तैयारी की जा रही है। स्थिति यह है कि रुड़की सिविल अस्पताल की अधिकांश ओपीडी खाली पड़ी हैं, जिससे आए दिन मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। यह हाल तब है जबकि इसी सप्ताह से कांवड़ यात्रा शुरू होनी है। वहीं, बरसात के साथ ही डेंगू और मलेरिया का भी खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर प्रशासन की ओर से डेंगू की रोकथाम के लिए आवश्यक एहतियात बरतने के निर्देश जारी किए गए हैं।
पिछले साल बरसात में डेंगू के कारण शहर से देहात तक कई लोगों को जान गंवानी पड़ी था। वहीं, डेढ़ हजार से अधिक मरीज सिविल अस्पताल पहुंचे थे। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग नहीं चेता है। स्थिति यह है कि सिविल अस्पताल चिकित्सकों से लगभग खाली हो चुका है। सीएमएस समेत छह चिकित्सकों के स्थानांतरण से यहां ओपीडी में भी मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। सोमवार को भी गिनेचुने चिकित्सक ही ओपीडी में रहे, जिससे मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। वहीं महिला चिकित्सक नहीं होने से लेबर रूम और महिला ओपीडी नर्सों के भरोसे संचालित की गई। पिछले कई दिनों से चल रहे चिकित्सकों के संकट के बावजूद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से सुध नहीं ली जा रही है, जबकि कांवड़ का काउंट डाउन शुरू हो चुका है। साथ ही बरसात के कारण डेंगू, मलेरिया सहित अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इस संबंध में सीएमएस डॉ. संजय कंसल का कहना है कि चिकित्सकों की समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
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