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बल्लीवाला फ्लाईओवर का नहीं होगा चौड़ीकरण
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बल्लीवाला फ्लाईओवर का नहीं होगा चौड़ीकरण
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। जीएमएस रोड स्थित बल्लीवाला फ्लाईओवर फिलहाल फोरलेन नहीं होगा। सरकार ने फोरलेन में 120 करोड़ रुपये खर्च होने और सरकार के समक्ष वित्तीय संकट का हवाला देते हुए इस महत्वपूर्ण फ्लाईओवर को फोरलेन करने से असमर्थता जता दी है। सरकार ने इस संबंध में अदालत को भी अवगत करा दिया है। दूसरी ओर इस प्रकरण के याचिकाकर्ता का कहना है कि वह प्रकरण को लेकर दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता रविंद्र जुगरान की ओर से बल्लीवाला फ्लाईओवर पर आए दिन होने वाले हादसों को लेकर इसके चौड़ीकरण के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए सरकार को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। अदालत के आदेश पर सरकार ने टेक्नीकल कंसलटेंसी सर्विसेज को कंसलटेंट नियुक्त किया था। कंसलटेंट ने बल्लीवाला फ्लाईओवर को बल्लूपुर से जीएमएस रोड की ओर चौड़ा करने का सुझाव दिया था। इसे लेकर करीब 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब सरकार ने अदालत को हलफनामा को देकर बताया कि सरकार के पास इतना बड़ा बजट नहीं है कि वह फ्लाईओवर में फोरलेन में तब्दील कर सकें।
दूसरी ओर याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 का उल्लंघन करते हुुए फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। केंद्र सरकार ने फोरलेन के निर्माण की स्वीकृति दी थी लेकिन राज्य सरकार ने इसे दो लेन का बना दिया। परिणामस्वरूप फ्लाईओवर पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। जुगरान का कहना है कि वे इस प्रकरण को लेकर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इस संबंध में राज्य सरकार को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से 120 करोड़ रुपये के बजट की मांग करनी चाहिए थी।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। जीएमएस रोड स्थित बल्लीवाला फ्लाईओवर फिलहाल फोरलेन नहीं होगा। सरकार ने फोरलेन में 120 करोड़ रुपये खर्च होने और सरकार के समक्ष वित्तीय संकट का हवाला देते हुए इस महत्वपूर्ण फ्लाईओवर को फोरलेन करने से असमर्थता जता दी है। सरकार ने इस संबंध में अदालत को भी अवगत करा दिया है। दूसरी ओर इस प्रकरण के याचिकाकर्ता का कहना है कि वह प्रकरण को लेकर दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
उल्लेखनीय है कि भाजपा नेता रविंद्र जुगरान की ओर से बल्लीवाला फ्लाईओवर पर आए दिन होने वाले हादसों को लेकर इसके चौड़ीकरण के संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत ने प्रकरण की सुनवाई करते हुए सरकार को फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार करने को कहा था। अदालत के आदेश पर सरकार ने टेक्नीकल कंसलटेंसी सर्विसेज को कंसलटेंट नियुक्त किया था। कंसलटेंट ने बल्लीवाला फ्लाईओवर को बल्लूपुर से जीएमएस रोड की ओर चौड़ा करने का सुझाव दिया था। इसे लेकर करीब 120 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब सरकार ने अदालत को हलफनामा को देकर बताया कि सरकार के पास इतना बड़ा बजट नहीं है कि वह फ्लाईओवर में फोरलेन में तब्दील कर सकें।
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दूसरी ओर याचिकाकर्ता रविंद्र जुगरान का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 का उल्लंघन करते हुुए फ्लाईओवर का निर्माण किया गया है। केंद्र सरकार ने फोरलेन के निर्माण की स्वीकृति दी थी लेकिन राज्य सरकार ने इसे दो लेन का बना दिया। परिणामस्वरूप फ्लाईओवर पर आए दिन हादसे हो रहे हैं। जुगरान का कहना है कि वे इस प्रकरण को लेकर दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। इस संबंध में राज्य सरकार को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय से 120 करोड़ रुपये के बजट की मांग करनी चाहिए थी।
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