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बहरेपन से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी
Updated Sun, 04 Mar 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादूून।
वर्ल्ड हियरिंग-डे पर शनिवार को दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी के दौरान लोगों को बहरेपन से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. विकास सिकरवाल ने कहा कि कुछ सावधानियां बरतकर बहरेपन से बचा जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित गोष्ठी में डॉ. विकास सिकरवाल ने छोटे बच्चों में बहरापन न हो इसके लिए अनिवार्य रूप से जांच होनी चाहिए। इस तरह के मामलों के छोटी उम्र में पकड़ में आने पर ऑपरेशन कर इसका इलॉज संभव है। इसके लिए अब से मेडिकल कॉलेज में जन्मे प्रत्येक नवजात की अब सुनने की जांच किए बगैर डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कान में कुछ डालने की आदत सबसे अधिक खतरनाक है। इससे कान में घाव हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य तरह की बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में कान में दर्द, पानी आने या फिर किसी तरह के घाव आदि की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. शिवानी, डॉ. आकांक्षा, डॉ .केसी पंत, डॉ. एसबी जोशी, डॉ. अनिल जोशी, डॉ. शिप्रा जोशी, डॉ. व्यास कुमार आदि मौजूद रहे।
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वर्ल्ड हियरिंग-डे पर शनिवार को दून मेडिकल कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी के दौरान लोगों को बहरेपन से बचाव के प्रति जागरूक किया गया। ईएनटी विभाग के एचओडी डॉ. विकास सिकरवाल ने कहा कि कुछ सावधानियां बरतकर बहरेपन से बचा जा सकता है।
मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित गोष्ठी में डॉ. विकास सिकरवाल ने छोटे बच्चों में बहरापन न हो इसके लिए अनिवार्य रूप से जांच होनी चाहिए। इस तरह के मामलों के छोटी उम्र में पकड़ में आने पर ऑपरेशन कर इसका इलॉज संभव है। इसके लिए अब से मेडिकल कॉलेज में जन्मे प्रत्येक नवजात की अब सुनने की जांच किए बगैर डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कान में कुछ डालने की आदत सबसे अधिक खतरनाक है। इससे कान में घाव हो सकता है। इसके अलावा कई अन्य तरह की बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे में कान में दर्द, पानी आने या फिर किसी तरह के घाव आदि की शिकायत होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ. शिवानी, डॉ. आकांक्षा, डॉ .केसी पंत, डॉ. एसबी जोशी, डॉ. अनिल जोशी, डॉ. शिप्रा जोशी, डॉ. व्यास कुमार आदि मौजूद रहे।
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