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गैरसैंण इसी वितीय सत्र में घोषित हो स्थायी राजधानी
Updated Tue, 27 Feb 2018 02:04 AM IST
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अमर/ब्यूरो उजाला, देहरादून
गैरसैंण को इसी वित्तीय सत्र में स्थायी राजधानी घोषित किया जाए। यह कहना है उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का। सोमवार को दल के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि जनभावना के अनुरूप गढ़वाल, कुमाऊं के मध्य में स्थित गैरसैंण राजधानी का दल ने 1992 में शिलान्यास किया।
उन्होंने कहा कि गैंरसैंण राज्य आंदोलन का केंद्र रहा है। राज्य आंदोलन के दौरान कौशिक समिति की रिपोर्ट एवं राज्य गठन के बाद दीक्षित आयोग की रिपोर्ट भी गैरसैंण के पक्ष में रही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से को उत्तराखंड में शामिल करने के नाम पर प्रदेश की जनता को भ्रमित किया जा रहा है। यदि सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल किया गया तो इसके विरोध में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने इसके बाद राज्यपाल से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया। राज्यपाल से मिलने वालों में संरक्षक बीडी रतूड़ी, डीएन टोडरिया, सुनील ध्यानी, देवेश्वर भट्ट, डीके पाल, लताफत हुसैन, देवेंद्र चमोली, किशन सिंह रावत मौजूद रहे।
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गैरसैंण को इसी वित्तीय सत्र में स्थायी राजधानी घोषित किया जाए। यह कहना है उक्रांद के केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का। सोमवार को दल के केंद्रीय कार्यालय में मीडिया से वार्ता में उन्होंने कहा कि जनभावना के अनुरूप गढ़वाल, कुमाऊं के मध्य में स्थित गैरसैंण राजधानी का दल ने 1992 में शिलान्यास किया।
उन्होंने कहा कि गैंरसैंण राज्य आंदोलन का केंद्र रहा है। राज्य आंदोलन के दौरान कौशिक समिति की रिपोर्ट एवं राज्य गठन के बाद दीक्षित आयोग की रिपोर्ट भी गैरसैंण के पक्ष में रही। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से को उत्तराखंड में शामिल करने के नाम पर प्रदेश की जनता को भ्रमित किया जा रहा है। यदि सहारनपुर को उत्तराखंड में शामिल किया गया तो इसके विरोध में जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने इसके बाद राज्यपाल से मिलकर उन्हें ज्ञापन दिया। राज्यपाल से मिलने वालों में संरक्षक बीडी रतूड़ी, डीएन टोडरिया, सुनील ध्यानी, देवेश्वर भट्ट, डीके पाल, लताफत हुसैन, देवेंद्र चमोली, किशन सिंह रावत मौजूद रहे।
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