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सरकारी अस्पताल फार्मेसिस्टों के भरोसे
Updated Mon, 26 Jun 2017 10:47 PM IST
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पाबौ। ब्लाक के राठ क्षेत्र के सरकारी अस्पताल फार्मेसिस्टों के भरोसे चल रहे हैं। ये अस्पताल कई समय से बिना डाक्टर के हैं। इसके चलते लोगों को बुखार व खांसी की दवा लेने के लिए भी कई किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है।
पाबौ ब्लॉक के अंतर्गत राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय सैंजी, चिपलघाट और साकरसैंण में डाक्टर नहीं हैं। इन अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज मजबूरन फार्मेसिस्टों पर ही निर्भर हैं। वहां पर बुखार-खांसी जैसी बीमारियां भी ठीक नहीं हुई तो मरीजों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ की दौड़ लगानी पड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल का कहना है कि एलोपैथिक अस्पतालों में भी डाक्टर नहीं हैं। एलोपैथिक अस्पताल सैंजी चार बेड का है। इसमें कई सालों से न तो बिजली की व्यवस्था है और न सफाईकर्मी। साकरसैंण में तीन दिन किसी दूसरे अस्पताल से फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है। चोडीख निवासी कुलदीप भंडारी, बुराशी निवासी महावीर खंकरीयाल, एसैंजी निवासी राकेश शाहू, बीरेंद्र भंडारी, शीशपाल भंडारी, फल्दुवाड़ी निवासी बालम राणा और धुलेत निवासी मातवर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से पलायन का मुख्य कारण है। लोगों ने कर्मचारियों की नियुक्ति न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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पाबौ ब्लॉक के अंतर्गत राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय सैंजी, चिपलघाट और साकरसैंण में डाक्टर नहीं हैं। इन अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीज मजबूरन फार्मेसिस्टों पर ही निर्भर हैं। वहां पर बुखार-खांसी जैसी बीमारियां भी ठीक नहीं हुई तो मरीजों को कई किलोमीटर की दूरी तय कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ की दौड़ लगानी पड़ती है। सामाजिक कार्यकर्ता सुरेंद्र प्रसाद नौटियाल का कहना है कि एलोपैथिक अस्पतालों में भी डाक्टर नहीं हैं। एलोपैथिक अस्पताल सैंजी चार बेड का है। इसमें कई सालों से न तो बिजली की व्यवस्था है और न सफाईकर्मी। साकरसैंण में तीन दिन किसी दूसरे अस्पताल से फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है। चोडीख निवासी कुलदीप भंडारी, बुराशी निवासी महावीर खंकरीयाल, एसैंजी निवासी राकेश शाहू, बीरेंद्र भंडारी, शीशपाल भंडारी, फल्दुवाड़ी निवासी बालम राणा और धुलेत निवासी मातवर सिंह आदि ग्रामीणों का कहना है शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से पलायन का मुख्य कारण है। लोगों ने कर्मचारियों की नियुक्ति न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
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