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भूजल के अत्यधिक दोहन पर जताई चिंता
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर।
नई दिशा जनहित ग्रामीण विकास समिति सहसपुर ने क्षेत्र में बिना अनुमति चलाए जा रहे बोरवेल से हो रहे अत्यधिक भूजल दोहन पर चिंता जताई हैं। समिति ने सहसपुर में बैठक कर भूजल दोहन पर रोक लगाने की मांग की है।
बैठक में समिति के संस्थापक अमर सिंह कश्यप ने कहा कि भूजल के अत्यधिक दोहन से भविष्य में पानी की मात्रा कम होने का खतरा है। साथ ही टैंकरों से बिना गुणवत्ता की जांच किए पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि घटते जल स्तर और जमीन के अंदर की बिगड़ती पर्यावरणीय संरचना की ओर ध्यान नहीं दिया रहा है। क्षेत्र में बिना अनुमति समरसेबल और बोरवेल चलाए जा रहे हैं। कई लोग इनका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। किसी भी बोरवेल संचालक के पास इनके संचालन की अनुमति नहीं है। जबकि कई जगहों पर आरक्षित वन क्षेत्र में भी वाटर पंप लगाए गए हैं। कहा कि पानी राष्ट्रीय संपदा है, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसका संरक्षण जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पानी के अत्यधिक दोहन पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। बैठक में आरटीआई कार्यकर्ता राजेश कुमार, बहादुर सिंह खरे, रजनीश कांबोज, सुरेंद्र नाथ भट्ट आदि मौजूद रहे।
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उधर, नलकूप खंड देहरादून के अधिशासी अभियंता वीएस पाल से इस बावत संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि अभी भूमिगत जल दोहन के बारे में उत्तराखंड में नीति अमल में नहीं लाई गई है। शासन स्तर पर इस पर कार्य प्रगतिशील है। नीति का निर्धारण होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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नई दिशा जनहित ग्रामीण विकास समिति सहसपुर ने क्षेत्र में बिना अनुमति चलाए जा रहे बोरवेल से हो रहे अत्यधिक भूजल दोहन पर चिंता जताई हैं। समिति ने सहसपुर में बैठक कर भूजल दोहन पर रोक लगाने की मांग की है।
बैठक में समिति के संस्थापक अमर सिंह कश्यप ने कहा कि भूजल के अत्यधिक दोहन से भविष्य में पानी की मात्रा कम होने का खतरा है। साथ ही टैंकरों से बिना गुणवत्ता की जांच किए पानी की आपूर्ति की जा रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने कहा कि घटते जल स्तर और जमीन के अंदर की बिगड़ती पर्यावरणीय संरचना की ओर ध्यान नहीं दिया रहा है। क्षेत्र में बिना अनुमति समरसेबल और बोरवेल चलाए जा रहे हैं। कई लोग इनका व्यावसायिक उपयोग कर रहे हैं। किसी भी बोरवेल संचालक के पास इनके संचालन की अनुमति नहीं है। जबकि कई जगहों पर आरक्षित वन क्षेत्र में भी वाटर पंप लगाए गए हैं। कहा कि पानी राष्ट्रीय संपदा है, भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसका संरक्षण जरूरी है।
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उन्होंने कहा कि पानी के अत्यधिक दोहन पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। बैठक में आरटीआई कार्यकर्ता राजेश कुमार, बहादुर सिंह खरे, रजनीश कांबोज, सुरेंद्र नाथ भट्ट आदि मौजूद रहे।
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उधर, नलकूप खंड देहरादून के अधिशासी अभियंता वीएस पाल से इस बावत संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि अभी भूमिगत जल दोहन के बारे में उत्तराखंड में नीति अमल में नहीं लाई गई है। शासन स्तर पर इस पर कार्य प्रगतिशील है। नीति का निर्धारण होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।