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रैली से किया बालिका शिक्षा के प्रति जागरूक
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
कालसी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत ब्लॉक संसाधन केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रैली निकालकर बालिका शिक्षा के प्रति जागरूक किया। बीआरसी परिसर से कालसी बाजार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक निकाली गई रैली में कार्यकर्ताओं ने नौनिहालों को आखर ज्ञान देने की जानकारी दी।
वहीं, महिलाओं को पोषण संबंधी जानकारी मुहैया कराने के साथ ही बालिका शिक्षा के महत्व से भी परिचय कराया। मुख्य प्रशिक्षक आशा नेगी और फातिमा हयात ने कहा कि शिक्षित बेटी ही समाज की जिम्मेदार और आत्मनिर्भर महिला बनती है। महिला आर्थिक व सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर होगी तो वह अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकती है। साथ ही शिक्षित महिला शोषण के खिलाफ अन्य महिलाओं को भी जागरूक करती है। कहा कि बेटियों का परिवार में दोयम दर्जे का समझा जाना समाज की निकृष्ट मानसिकता को दर्शाता है। बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहीं हैं। जरूरत सिर्फ प्रत्येक बेटी को शिक्षित कर उसकी नैसर्गिक प्रतिभा को निखारने की है। कहा कि बेटियां संवेदनशील होती हैं, जो परिवार के साथ ही समाज की परिस्थितियों को ज्यादा आसानी से समझती हैं। यदि उन्हें सामाजिक मसलों का हल करने का मौका दिया जाए तो समाज विकृतियों से विहीन हो जाएगा। लिहाजा, प्रत्येक बेटी को शिक्षित कर उसे समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाना जरूरी है। रैली में भूमो जोशी, लक्ष्मी तोमर, बाला, रुमिता, रीना, संगीता, निर्मला चौहान, सुरमा चौहान, प्रेमा, शीला आदि शामिल रहीं।
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कालसी। समग्र शिक्षा अभियान के तहत ब्लॉक संसाधन केंद्र में चल रहे प्रशिक्षण के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रैली निकालकर बालिका शिक्षा के प्रति जागरूक किया। बीआरसी परिसर से कालसी बाजार स्थित आंगनबाड़ी केंद्र तक निकाली गई रैली में कार्यकर्ताओं ने नौनिहालों को आखर ज्ञान देने की जानकारी दी।
वहीं, महिलाओं को पोषण संबंधी जानकारी मुहैया कराने के साथ ही बालिका शिक्षा के महत्व से भी परिचय कराया। मुख्य प्रशिक्षक आशा नेगी और फातिमा हयात ने कहा कि शिक्षित बेटी ही समाज की जिम्मेदार और आत्मनिर्भर महिला बनती है। महिला आर्थिक व सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर होगी तो वह अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा सकती है। साथ ही शिक्षित महिला शोषण के खिलाफ अन्य महिलाओं को भी जागरूक करती है। कहा कि बेटियों का परिवार में दोयम दर्जे का समझा जाना समाज की निकृष्ट मानसिकता को दर्शाता है। बेटियां हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रहीं हैं। जरूरत सिर्फ प्रत्येक बेटी को शिक्षित कर उसकी नैसर्गिक प्रतिभा को निखारने की है। कहा कि बेटियां संवेदनशील होती हैं, जो परिवार के साथ ही समाज की परिस्थितियों को ज्यादा आसानी से समझती हैं। यदि उन्हें सामाजिक मसलों का हल करने का मौका दिया जाए तो समाज विकृतियों से विहीन हो जाएगा। लिहाजा, प्रत्येक बेटी को शिक्षित कर उसे समाज की मुख्यधारा में शामिल किया जाना जरूरी है। रैली में भूमो जोशी, लक्ष्मी तोमर, बाला, रुमिता, रीना, संगीता, निर्मला चौहान, सुरमा चौहान, प्रेमा, शीला आदि शामिल रहीं।
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