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जर्जर पुलों पर जान जोखिम में डाल कर सफर कर रहे ग्रामीण
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ब्यूरो/अमर उजाला, साहिया
कालसी ब्लॉक अंतर्गत वर्ष 2013 की आपदा से क्षतिग्रस्त हुए एक दर्जन से अधिक पुलों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। कई जगहों पर ग्रामीणों को पानी में उतर कर खाले पार करने पड़ रहे हैं। सर्दी के मौसम में ग्रामीणों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2013 की आपदा में कालसी ब्लॉक में एक दर्जन से अधिक पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे। अलग-अलग मदों से बने इन पुलों के रखरखाव के लिए कोई एक संस्था जिम्मेदार नहीं होने से अब इनकी मरम्मत नहीं हो पाई है। पुलों के क्षतिग्रस्त होने के बाद हर रोज ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने पर मजबूर हैं। सेवाना छानी से पानुवा गांव जाने के लिए अमलावा नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। मोकाड़ खड्ड की तीन पुलिया, चरगाड़ खड्ड की दो, जमाड़ खड्ड की दो पुलिया के साथ ही गड़ेथा खड्ड, साहिया छानी और तारली गाड पर बने पुल भी आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए थे। स्थानीय अमर सिंह चौहान, श्याम सिंह राठौर, संतन सिंह राठौर ने बताया कि स्थानीय प्रशासन से कई बार क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके अधिकारी ग्रामीणों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, खंड विकास अधिकारी वीपी खंडूड़ी ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण के लिए दैवीय आपदा मद में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट उपलब्ध होते ही मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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कालसी ब्लॉक अंतर्गत वर्ष 2013 की आपदा से क्षतिग्रस्त हुए एक दर्जन से अधिक पुलों की मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है। कई जगहों पर ग्रामीणों को पानी में उतर कर खाले पार करने पड़ रहे हैं। सर्दी के मौसम में ग्रामीणों को आवाजाही में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्ष 2013 की आपदा में कालसी ब्लॉक में एक दर्जन से अधिक पुल क्षतिग्रस्त हो गए थे। अलग-अलग मदों से बने इन पुलों के रखरखाव के लिए कोई एक संस्था जिम्मेदार नहीं होने से अब इनकी मरम्मत नहीं हो पाई है। पुलों के क्षतिग्रस्त होने के बाद हर रोज ग्रामीण जान जोखिम में डालकर सफर करने पर मजबूर हैं। सेवाना छानी से पानुवा गांव जाने के लिए अमलावा नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया था। मोकाड़ खड्ड की तीन पुलिया, चरगाड़ खड्ड की दो, जमाड़ खड्ड की दो पुलिया के साथ ही गड़ेथा खड्ड, साहिया छानी और तारली गाड पर बने पुल भी आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त हो गए थे। स्थानीय अमर सिंह चौहान, श्याम सिंह राठौर, संतन सिंह राठौर ने बताया कि स्थानीय प्रशासन से कई बार क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण की मांग की जा चुकी है। बावजूद इसके अधिकारी ग्रामीणों की समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, खंड विकास अधिकारी वीपी खंडूड़ी ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण के लिए दैवीय आपदा मद में प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। बजट उपलब्ध होते ही मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
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