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जौनसार बावर में लोक संस्कृति से गुलजार हुए पंचायती आंगन
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ब्यूरो/अमर उजाला, चकराता/कालसी/साहिया
जौनसार बावर के पंचायती आंगन शनिवार को लोक संस्कृति से गुलजार रहे। क्षेत्र की 28 खतों में मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ ही माघ मरोज पर्व का आगाज हो गया। देर रात विभिन्न स्थानों पर लोक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए गए। इसमें क्षेत्र की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
जौनसार बावर अपनी अनूठी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थानीय स्तर पर कई त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक महीने तक मनाया जाने वाला माघ मरोज पर्व समस्त जौनसार बावर क्षेत्र में शनिवार से शुरू हो गया। अब एक महीने तक पंचायती आंगनों में हारुल, तांदी नृत्यों का दौर चलेगा। साहिया में त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी की। इससे बाजार में सुबह से भीड़ भाड़ रही। लोगों ने 20 से 25 हजार कीमत के बकरों की खरीदारी की। देवता की पूजा अर्चना के बाद बकरे चढ़ाए गए। बावर में शनिवार को सिराच मनाई गई। जबकि, जौनसार में माघ पर्व के आगाज के बाद मसांद, पाऊणाई, बोईदाणा मनाया जाएगा।
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ओवरलोड वाहनों में लोगों ने किया सफर
- त्योहार के कारण घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को नहीं मिल रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया। माघ मरोज पर्व पर वाहन नहीं मिलने से लोग ओवरलोड वाहनों में जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें वाहन नहीं मिल रहा है। इससे मजबूरन ओवरलोड वाहनों पर बैठकर जाना पड़ रहा है।
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इन दिनों जौनसार बावर क्षेत्र में मरोज त्योहार की धूम है। क्षेत्र में चलने वाले छोटे वाहनों के अधिकतर चालक भी स्थानीय ही हैं। जो मरोज त्योहार मना रहे हैं। ऐसे में वाहनों का संचालन नहीं होने से त्योहार में घर आने और जाने वाले लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली से आए जगथांन निवासी कुंवर सिंह, जोगियो के सब्बल सिंह, मंझगांव के सियाराम आदि का कहना है कि वे किसी तरह चकराता पहुंचे। लेकिन, चकराता से गांव जाने के लिए घंटों इतजार के बावजूद उन्हें वाहन नहीं मिला। नतीजतन उन्हें मुंह मांगा पैसा देकर वाहन बुक कराना पड़ा। स्थानीय रमेश रावत, सालकराम, वीरेंद्र जोशी, रणवीर सिंह, चमन, केशर चौहान आदि का कहना है कि रोडवेज द्वारा चकराता में पर्याप्त बसें नहीं चलाने के कारण हमेशा यातायात की समस्या बनी रहती है। अधिकतर आबादी को छोटे ओवरलोड वाहनों पर जान जोखिम में डाल कर सफर करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि त्योहारों के समय अतिरिक्त बसों का संचालन किया जाना चाहिए।
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जौनसार बावर के पंचायती आंगन शनिवार को लोक संस्कृति से गुलजार रहे। क्षेत्र की 28 खतों में मंदिरों में पूजा अर्चना के साथ ही माघ मरोज पर्व का आगाज हो गया। देर रात विभिन्न स्थानों पर लोक गीत और नृत्य प्रस्तुत किए गए। इसमें क्षेत्र की लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।
जौनसार बावर अपनी अनूठी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। यहां स्थानीय स्तर पर कई त्योहार मनाए जाते हैं। इनमें से एक महीने तक मनाया जाने वाला माघ मरोज पर्व समस्त जौनसार बावर क्षेत्र में शनिवार से शुरू हो गया। अब एक महीने तक पंचायती आंगनों में हारुल, तांदी नृत्यों का दौर चलेगा। साहिया में त्योहार को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। लोगों ने बाजारों में जमकर खरीदारी की। इससे बाजार में सुबह से भीड़ भाड़ रही। लोगों ने 20 से 25 हजार कीमत के बकरों की खरीदारी की। देवता की पूजा अर्चना के बाद बकरे चढ़ाए गए। बावर में शनिवार को सिराच मनाई गई। जबकि, जौनसार में माघ पर्व के आगाज के बाद मसांद, पाऊणाई, बोईदाणा मनाया जाएगा।
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ओवरलोड वाहनों में लोगों ने किया सफर
- त्योहार के कारण घंटों इंतजार के बाद भी लोगों को नहीं मिल रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
साहिया। माघ मरोज पर्व पर वाहन नहीं मिलने से लोग ओवरलोड वाहनों में जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें वाहन नहीं मिल रहा है। इससे मजबूरन ओवरलोड वाहनों पर बैठकर जाना पड़ रहा है।
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इन दिनों जौनसार बावर क्षेत्र में मरोज त्योहार की धूम है। क्षेत्र में चलने वाले छोटे वाहनों के अधिकतर चालक भी स्थानीय ही हैं। जो मरोज त्योहार मना रहे हैं। ऐसे में वाहनों का संचालन नहीं होने से त्योहार में घर आने और जाने वाले लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली से आए जगथांन निवासी कुंवर सिंह, जोगियो के सब्बल सिंह, मंझगांव के सियाराम आदि का कहना है कि वे किसी तरह चकराता पहुंचे। लेकिन, चकराता से गांव जाने के लिए घंटों इतजार के बावजूद उन्हें वाहन नहीं मिला। नतीजतन उन्हें मुंह मांगा पैसा देकर वाहन बुक कराना पड़ा। स्थानीय रमेश रावत, सालकराम, वीरेंद्र जोशी, रणवीर सिंह, चमन, केशर चौहान आदि का कहना है कि रोडवेज द्वारा चकराता में पर्याप्त बसें नहीं चलाने के कारण हमेशा यातायात की समस्या बनी रहती है। अधिकतर आबादी को छोटे ओवरलोड वाहनों पर जान जोखिम में डाल कर सफर करना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि त्योहारों के समय अतिरिक्त बसों का संचालन किया जाना चाहिए।