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जयकारों के बीच शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के कपाट बंद
Updated Tue, 20 Nov 2018 10:47 PM IST
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गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं। यात्रा के अंतिम दिन 5237 तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। इस दौरान जय बदरीविशाल के जयकारों से बदरीनाथ धाम गुंजायमान हो उठा।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और वेदपाठियों के गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर धाम के कपाट छह माह तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। सुबह पांच बजे से भगवान बदरीनाथ की अभिषेक और महा अभिषेक पूजाएं शुरू हुई। गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया। धाम में धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चली। दोपहर दो बजे धार्मिक परंपरा के अनुसार रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा और माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। इसके बाद बदरीनाथ गर्भगृह से भगवान कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाया गया। बुधवार को आदि गुरु शंकराचार्य के साथ ही कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी। इस मौके पर बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, दिवाकर चमोली, शिव सिंह रावत, डा. हरीश गौड़, सुनील तिवारी, विपिन तिवारी, पीतांबर मोल्फा, दिनेश डिमरी, आशुतोष डिमरी, प्रकाश भंडारी, मोहन सती, राजेंद्र चौहान आदि मौजूद थे।
स्वामी रामदेव ने किए बदरीनाथ के दर्शन
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर स्वामी रामदेव, स्वामी अवधेशानंद गिरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। वे करीब पंद्रह मिनट तक बदरीनाथ धाम में चल रही पूजाओं में शामिल हुए। करीब एक घंटे तक धाम में रहने के बाद वे हेलीकॉप्टर से लौट गए। धाम में इस दौरान सेना की बैंड धुन मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, गढ़वाल स्काउट, ग्रीफ और मंदिर समिति की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। ब्यूरो
धार्मिक परंपराओं के अनुसार बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल और वेदपाठियों के गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ अपराह्न 3 बजकर 21 मिनट पर धाम के कपाट छह माह तक के लिए बंद कर दिए गए हैं। सुबह पांच बजे से भगवान बदरीनाथ की अभिषेक और महा अभिषेक पूजाएं शुरू हुई। गुप्त मंत्रोच्चारण के साथ भगवान बदरीनाथ का आह्वान किया। धाम में धार्मिक प्रक्रियाएं दोपहर तक चली। दोपहर दो बजे धार्मिक परंपरा के अनुसार रावल ईश्वरी प्रसाद नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा और माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीनाथ को ओढ़ाया गया। इसके बाद बदरीनाथ गर्भगृह से भगवान कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाया गया। बुधवार को आदि गुरु शंकराचार्य के साथ ही कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना होंगी। आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर में विराजमान होगी। इस मौके पर बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह, दिवाकर चमोली, शिव सिंह रावत, डा. हरीश गौड़, सुनील तिवारी, विपिन तिवारी, पीतांबर मोल्फा, दिनेश डिमरी, आशुतोष डिमरी, प्रकाश भंडारी, मोहन सती, राजेंद्र चौहान आदि मौजूद थे।
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स्वामी रामदेव ने किए बदरीनाथ के दर्शन
गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के मौके पर स्वामी रामदेव, स्वामी अवधेशानंद गिरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। वे करीब पंद्रह मिनट तक बदरीनाथ धाम में चल रही पूजाओं में शामिल हुए। करीब एक घंटे तक धाम में रहने के बाद वे हेलीकॉप्टर से लौट गए। धाम में इस दौरान सेना की बैंड धुन मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। वहीं, गढ़वाल स्काउट, ग्रीफ और मंदिर समिति की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया। ब्यूरो
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