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23 से 27 नवंबर तक होगा गौचर मेला
Updated Wed, 17 Oct 2018 09:32 PM IST
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कर्णप्रयाग। 14 नवंबर से शुरू होने वाला राजकीय औद्योगिक विकास मेला इस बार निकाय चुनाव के कारण 23 से 27 नवंबर तक आयोजित होगा। निकाय चुनाव की आचार संहिता के कारण प्रशासन ने यह निर्णय लिया है।
गौचर मेला मैदान में होने वाले 68वें राजकीय औद्योगिक विकास मेले की तैयारियां जोरों पर थीं। हर वर्ष 14 नवंबर से 20 नवंबर तक होने वाले इस मेले को समिति भव्य बनाने में जुटी थी। स्थानीय उत्पादों से बनने वाली खाद्य सामग्री और फूड फेस्टिवल मेले में होना था और राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल प्रतियोगिता का आयोजन भी प्रशासन कर रहा था, लेकिन निकाय चुनाव की आचार संहिता के चलते प्रशासन ने कदम पीछे खींच लिए हैं। डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि मेला अपने निश्चित समय पर भी किया जा सकता था, लेकिन आचार संहिता के चलते मेले में भव्यता और रौनक नहीं आती। इसके चलते मेले को 23 नवंबर से 29 नवंबर तक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही 26 और 27 अक्तूबर को कालेश्वर में होने वाला हिमालयन कान्क्लेव का आयोजन यथावत है। इसमें पहाड़ के किसानों से विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन की मार्केटिंग कंपनियां सीधे किसानों से वार्ता करेंगी। डीएम ने कहा कि कार्यक्रम का लक्ष्य किसानों को अधिकतम और बेहतर बाजार उपलब्ध हो, जिसके चलते पहाड़ में होने वाले आलू, राजमा, माल्टा, चौलाई और सोयाबीन आदि उत्पादों को सीधा बाजार मिल सके।
गौचर मेला मैदान में होने वाले 68वें राजकीय औद्योगिक विकास मेले की तैयारियां जोरों पर थीं। हर वर्ष 14 नवंबर से 20 नवंबर तक होने वाले इस मेले को समिति भव्य बनाने में जुटी थी। स्थानीय उत्पादों से बनने वाली खाद्य सामग्री और फूड फेस्टिवल मेले में होना था और राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबाल प्रतियोगिता का आयोजन भी प्रशासन कर रहा था, लेकिन निकाय चुनाव की आचार संहिता के चलते प्रशासन ने कदम पीछे खींच लिए हैं। डीएम स्वाति एस. भदौरिया ने कहा कि मेला अपने निश्चित समय पर भी किया जा सकता था, लेकिन आचार संहिता के चलते मेले में भव्यता और रौनक नहीं आती। इसके चलते मेले को 23 नवंबर से 29 नवंबर तक करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही 26 और 27 अक्तूबर को कालेश्वर में होने वाला हिमालयन कान्क्लेव का आयोजन यथावत है। इसमें पहाड़ के किसानों से विभिन्न ऑनलाइन और ऑफलाइन की मार्केटिंग कंपनियां सीधे किसानों से वार्ता करेंगी। डीएम ने कहा कि कार्यक्रम का लक्ष्य किसानों को अधिकतम और बेहतर बाजार उपलब्ध हो, जिसके चलते पहाड़ में होने वाले आलू, राजमा, माल्टा, चौलाई और सोयाबीन आदि उत्पादों को सीधा बाजार मिल सके।
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