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समाप्त की जाए विधायकों की पेंशन
Updated Sun, 02 Sep 2018 02:04 AM IST
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समाप्त की जाए विधायकों की पेंशन
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
विकासनगर। विधायकों की पेंशन समाप्त करने की मांग के समर्थन में जनसंघर्ष मोर्चा ने शनिवार को तहसील मुख्यालय में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद मांग से संबंधित ज्ञापन एसडीएम जितेंद्र कुमार को सौंपा।
जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की माली हालत बेहद खराब है। प्रदेश पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। ब्याज चुकाने के लिए भी सरकार कर्ज ले रही है। ऐसे में विधायकों को पेंशन देकर सरकार राजस्व पर आर्थिक बोझ डाल रही है। वर्ष 2008 में विधायकों को छह हजार रुपये पेंशन मिलती थी, लेकिन आज यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार रुपये प्रति माह पर पहुंच गया है। 65 वर्ष के पश्चात पेंशन में पांच फीसदी, 70 वर्ष पर 10 फीसदी, 75 वर्ष पर 25 फीसदी और 80 वर्ष के बाद 50 फीसदी की बढ़ोतरी का प्राविधान है। पेंशन लेकर विधायक समाज सेवक न होकर सरकारी सेवक बन गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। नेगी ने कहा कि वर्ष 2005 के बाद से सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है, सिर्फ अंशदायी पेंशन है। इसके बावजूद पूर्व विधायकों को जीवन पर्यंत पेंशन की व्यवस्था कतई उचित नहीं है। वहीं बीते 10 वर्ष के अंतराल में विधायकों की पेंशन में लगभग सात फीसदी का इजाफा कर दिया गया है। प्रदर्शन में आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, डॉ. ओपी पंवार, ओपी राणा, विष्णु प्रसाद, मोहम्मद नसीम, फतेह आलिम, निर्मला देवी, कुलभूषण, मुन्ना लाल शर्मा, कुंवर सिंह नेगी, एसएन शर्मा, जयपाल सिंह, बिशन सिंह नेगी, अनिल गौड, रैहबर अली, महेंद्र सिंघल, फकीर दत्त, रवि भटनागर, बुशरा, जगदीश रावत, जाबिर हसन आदि शामिल रहे।
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
विकासनगर। विधायकों की पेंशन समाप्त करने की मांग के समर्थन में जनसंघर्ष मोर्चा ने शनिवार को तहसील मुख्यालय में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इसके बाद मांग से संबंधित ज्ञापन एसडीएम जितेंद्र कुमार को सौंपा।
जनसंघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश की माली हालत बेहद खराब है। प्रदेश पर 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। ब्याज चुकाने के लिए भी सरकार कर्ज ले रही है। ऐसे में विधायकों को पेंशन देकर सरकार राजस्व पर आर्थिक बोझ डाल रही है। वर्ष 2008 में विधायकों को छह हजार रुपये पेंशन मिलती थी, लेकिन आज यह आंकड़ा बढ़कर 40 हजार रुपये प्रति माह पर पहुंच गया है। 65 वर्ष के पश्चात पेंशन में पांच फीसदी, 70 वर्ष पर 10 फीसदी, 75 वर्ष पर 25 फीसदी और 80 वर्ष के बाद 50 फीसदी की बढ़ोतरी का प्राविधान है। पेंशन लेकर विधायक समाज सेवक न होकर सरकारी सेवक बन गए हैं, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए घातक है। नेगी ने कहा कि वर्ष 2005 के बाद से सरकारी कर्मचारियों के लिए पेंशन की कोई व्यवस्था नहीं है, सिर्फ अंशदायी पेंशन है। इसके बावजूद पूर्व विधायकों को जीवन पर्यंत पेंशन की व्यवस्था कतई उचित नहीं है। वहीं बीते 10 वर्ष के अंतराल में विधायकों की पेंशन में लगभग सात फीसदी का इजाफा कर दिया गया है। प्रदर्शन में आकाश पंवार, दिलबाग सिंह, डॉ. ओपी पंवार, ओपी राणा, विष्णु प्रसाद, मोहम्मद नसीम, फतेह आलिम, निर्मला देवी, कुलभूषण, मुन्ना लाल शर्मा, कुंवर सिंह नेगी, एसएन शर्मा, जयपाल सिंह, बिशन सिंह नेगी, अनिल गौड, रैहबर अली, महेंद्र सिंघल, फकीर दत्त, रवि भटनागर, बुशरा, जगदीश रावत, जाबिर हसन आदि शामिल रहे।
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