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कुलसारी बनेगा बासमती का कटोरा
Updated Sun, 26 Aug 2018 10:28 PM IST
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थराली। कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों की मुहिम यदि रंग लाई तो तहसील का कुलसारी क्षेत्र बासमती के कटोरे के रूप में पहचाना बनाएगा। यहां कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिकों ने ट्रायल के तौर पर बासमती पूसा 1509 प्रजाति की बासमती उगाई है। यह ट्रायल सफल रहा और यहां बासमती की अच्छी पैदावार हो रही है। अब किसान स्वयं इस फसल को उगाएं तो क्षेत्र में खूब बासमती लहलहाएगी।
कुलसारी धान की अच्छी पैदावार के लिए पहचाना जाता है। इसको देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग ने कुलसारी में पूसा बासमती 1509 के उत्पादन का निर्णय लिया। ट्रायल के तौर पर यहां ग्रामीणों की मदद से जून माह में दस नाली भूमि पर बासमती की पौध लगाई गई। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालदम के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर और कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी आनंद गोस्वामी ने बताया कि चमोली जिले में पहली बार बासमती के उत्पादन का प्रयोग किया गया जो सफल रहा। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कुलसारी गांव में पूसा बासमती की नर्सरी बनाई और पौध लगाई गई। आज एक पौध से 60 से 80 बालियां फूटी हैं, जबकि अन्य बालियों का फूटना जारी है जो 120 से 150 तक होती हैं। यानी एक पौध से 100 से अधिक बालियां लहलहाएंगी और अक्तूबर अंत तक बासमती की फसल तैयार हो जाएगी। किसान खिलाप सिंह, दिनेश सती, आनंद राम आदि का कहना है कि देश की उन्नत किस्म की बासमती यहां पैदा हो रही है। सहायक कृषि अधिकारी रजत कुमार का कहना है कि पूसा बासमती 1509 के लिए किसानों की डिमांड आ रही है। यदि किसान बड़ी मात्रा में पूसा 1509 की प्रजाति उगाएंगे तो कुलसारी आने वाले समय में बासमती के कटोरे के रूप में पहचाना जाएगा।
कुलसारी धान की अच्छी पैदावार के लिए पहचाना जाता है। इसको देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों और कृषि विभाग ने कुलसारी में पूसा बासमती 1509 के उत्पादन का निर्णय लिया। ट्रायल के तौर पर यहां ग्रामीणों की मदद से जून माह में दस नाली भूमि पर बासमती की पौध लगाई गई। कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालदम के वैज्ञानिक डा. अजय प्रभाकर और कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी आनंद गोस्वामी ने बताया कि चमोली जिले में पहली बार बासमती के उत्पादन का प्रयोग किया गया जो सफल रहा। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत कुलसारी गांव में पूसा बासमती की नर्सरी बनाई और पौध लगाई गई। आज एक पौध से 60 से 80 बालियां फूटी हैं, जबकि अन्य बालियों का फूटना जारी है जो 120 से 150 तक होती हैं। यानी एक पौध से 100 से अधिक बालियां लहलहाएंगी और अक्तूबर अंत तक बासमती की फसल तैयार हो जाएगी। किसान खिलाप सिंह, दिनेश सती, आनंद राम आदि का कहना है कि देश की उन्नत किस्म की बासमती यहां पैदा हो रही है। सहायक कृषि अधिकारी रजत कुमार का कहना है कि पूसा बासमती 1509 के लिए किसानों की डिमांड आ रही है। यदि किसान बड़ी मात्रा में पूसा 1509 की प्रजाति उगाएंगे तो कुलसारी आने वाले समय में बासमती के कटोरे के रूप में पहचाना जाएगा।
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