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श्रावण मास में शिव अराधना सब से फलदायी
Updated Sun, 05 Aug 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
मुनिकीरेती। कथावाचक शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में शिवलिंग पर बेलपत्री चढ़ाने से मनुष्य सभी प्रकार के पाप से मुक्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि शिवकथा के श्रवण से मनुष्य का भाग्य जागृत होता है।
ढालवाला में आयोजित शिव महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन शनिवार को श्रवणकों को दिव्य कथा सुनाने हुए कथा व्यास शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में शिव आराधना सबसे फलदायी होती है। सच्चे मन से शिव की आराधना करने से मनुष्य सब पाप से मुक्त हो जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर बेलपत्री चढ़ाने मात्र से ही मनुष्य का इस लोक ही नहीं परलोक भी सुधर जाता है। श्रावण मास में शिव की भक्ति में लीन मनुष्य हर संतापों से मुक्त हो जाता है। इस मौके पर कथा के मध्य भगवान शिव के विभिन्न रूपों की झांकियां भी निकाली गईं। धार्मिक अनुष्ठान में समिति अध्यक्ष सरस्वती जोशी, संयोजक ऊषा बडोला, निर्मला उनियाल, दीपा भट्ट, इंदिरा आर्य, सीमा बिजल्वाण, पूनम जोशी, सरिता भंडारी, सूरत सिंह चौहान, आशीष कुकरेती, सुरेंद्र रतूड़ी, अनीता खंतवाल, शांति ठाकुर, सुशीला देवी, चंदा देवी आदि शामिल रहे।
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मुनिकीरेती। कथावाचक शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में शिवलिंग पर बेलपत्री चढ़ाने से मनुष्य सभी प्रकार के पाप से मुक्त हो जाता है। उन्होंने बताया कि शिवकथा के श्रवण से मनुष्य का भाग्य जागृत होता है।
ढालवाला में आयोजित शिव महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन शनिवार को श्रवणकों को दिव्य कथा सुनाने हुए कथा व्यास शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में शिव आराधना सबसे फलदायी होती है। सच्चे मन से शिव की आराधना करने से मनुष्य सब पाप से मुक्त हो जाता है। इस दौरान शिवलिंग पर बेलपत्री चढ़ाने मात्र से ही मनुष्य का इस लोक ही नहीं परलोक भी सुधर जाता है। श्रावण मास में शिव की भक्ति में लीन मनुष्य हर संतापों से मुक्त हो जाता है। इस मौके पर कथा के मध्य भगवान शिव के विभिन्न रूपों की झांकियां भी निकाली गईं। धार्मिक अनुष्ठान में समिति अध्यक्ष सरस्वती जोशी, संयोजक ऊषा बडोला, निर्मला उनियाल, दीपा भट्ट, इंदिरा आर्य, सीमा बिजल्वाण, पूनम जोशी, सरिता भंडारी, सूरत सिंह चौहान, आशीष कुकरेती, सुरेंद्र रतूड़ी, अनीता खंतवाल, शांति ठाकुर, सुशीला देवी, चंदा देवी आदि शामिल रहे।
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