{"_id":"5b58e3804f1c1ba61f8b5317","slug":"153255205916-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जिंदगी को खतरे में डाल सफर कर रहे छात्र","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जिंदगी को खतरे में डाल सफर कर रहे छात्र
Updated Thu, 26 Jul 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर/सेलाकुई।
शिमला बाईपास रोड पर यातायात नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्कूल से घर पहुंचने की जल्दबाजी के चक्कर में छात्र अपनी जान की परवाह किए बगैर बसों के दरवाजे और पीछे बनी सीढ़ियों पर लटक कर सफर कर रहे हैं। वहीं अन्य लोगों को भी बसों में ठूंस-ठूंस कर ढोया जा रहा है। ऐसे में जरा सी चूक होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र की सड़कों पर चलते यह वाहन कहीं नजर नहीं आते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस ऑपरेटर लालच में सवारियां अधिक भर लेते हैं। इससे बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। बची-खुची कसर स्कूली छात्र बसों की छतों पर सवार होकर पूरी कर देते हैं। दोपहर के समय जैसे ही स्कूलों की छुट्टी होती है तो घर पहुंचने की जल्दी में जो भी बस आती है छात्र उसकी खिड़की और पीछे बनी सीढ़ियों पर सवार हो जाते हैं।
मालूम हो कि हाल ही में हाईकोर्ट ने ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं बावजूद शिमला बाईपास रोड पर चलने वाली बसों में ओवरलोडिंग का सिलसिला बदस्तूर जारी है। छात्र अमन सिंह, प्रवीन चौहान, बिट्टू तोमर आदि का कहना है कि क्षेत्र में बसों की संख्या सीमित है। छोटे वाहन चालक उन्हें वाहनों में नहीं बैठाते। ऐसे में बसों के ओवरलोड होने के कारण उन्हें मजबूरी में बसों के दरवाजों और छतों और पीछे बनी सीढ़ियों पर ओवरलोड सफर करना पड़ता है। एआरटीओ सुनील शर्मा ने बताया कि ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। ऐसे बस ऑपरेटरों को चिह्नित कर उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। ओवरलोडिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
शिमला बाईपास रोड पर यातायात नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्कूल से घर पहुंचने की जल्दबाजी के चक्कर में छात्र अपनी जान की परवाह किए बगैर बसों के दरवाजे और पीछे बनी सीढ़ियों पर लटक कर सफर कर रहे हैं। वहीं अन्य लोगों को भी बसों में ठूंस-ठूंस कर ढोया जा रहा है। ऐसे में जरा सी चूक होने पर बड़ा हादसा हो सकता है। परिवहन विभाग के अधिकारियों को क्षेत्र की सड़कों पर चलते यह वाहन कहीं नजर नहीं आते।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बस ऑपरेटर लालच में सवारियां अधिक भर लेते हैं। इससे बसों में पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। बची-खुची कसर स्कूली छात्र बसों की छतों पर सवार होकर पूरी कर देते हैं। दोपहर के समय जैसे ही स्कूलों की छुट्टी होती है तो घर पहुंचने की जल्दी में जो भी बस आती है छात्र उसकी खिड़की और पीछे बनी सीढ़ियों पर सवार हो जाते हैं।
विज्ञापन
मालूम हो कि हाल ही में हाईकोर्ट ने ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं बावजूद शिमला बाईपास रोड पर चलने वाली बसों में ओवरलोडिंग का सिलसिला बदस्तूर जारी है। छात्र अमन सिंह, प्रवीन चौहान, बिट्टू तोमर आदि का कहना है कि क्षेत्र में बसों की संख्या सीमित है। छोटे वाहन चालक उन्हें वाहनों में नहीं बैठाते। ऐसे में बसों के ओवरलोड होने के कारण उन्हें मजबूरी में बसों के दरवाजों और छतों और पीछे बनी सीढ़ियों पर ओवरलोड सफर करना पड़ता है। एआरटीओ सुनील शर्मा ने बताया कि ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान लगातार जारी है। ऐसे बस ऑपरेटरों को चिह्नित कर उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। ओवरलोडिंग को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विज्ञापन