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छह साल से क्षतिग्रस्त हैं पांच पुल और 17 पुलिया
Updated Sun, 10 Jun 2018 02:07 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
कालसी प्रखंड में छह साल पहले क्षतिग्रस्त हुए पांच पुल और 17 पुलियाओं की अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई है। जिससे क्षेत्र के लोगों इस बार भी बरसात में मुख्य मार्ग और खेतों तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी होगी। उन्हें अपने खेतों और मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए तीन से चार किमी अतिरिक्त दूरी नापनी होगी।
क्षेेत्र में करीब पांच पैदल पुल और 17 पुलियाएं वर्ष 2013 से क्षतिग्रस्त हैं। छह साल बीतने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं की जा सकी हैं जबकि, ये पैदल पुल और पुलियाएं ग्रामीण अंचलों की अंदरूनी कनेक्टिविटी की रीढ़ मानी जाती हैं। ऐसे में इस साल भी बरसात में जब नदियों और खड्डों में जल स्तर बढ़ेगा तो लोगों को खेतों और मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जड़वाला के संतन सिंह राठौर, पंजिया के नारायण सिंह, साहिया छानी के सतपाल राय का कहना है कि पुलियाओं के क्षतिग्रस्त होने से बरसात के दौरान उन्हें खेतों तक पहुंचने के लिए तीन से चार किमी की दूरी नापकर खेतों और दूसरे तक पहुंचना होता है। बरसात में नदी और खड्ड में पानी बढ़ने से अस्थायी पुल बह जाते हैं। कहा लंबे समय से वह पुलियाओं मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं देता।
ये पुल और पुलियाएं हैं क्षतिग्रस्त
अमलावा नदी में सेवनाछानी, जड़वाल, शंभू की चौकी, साहिया छानी और तारलीगाड के पास बने पुल जहां मरम्मत की राह देख रहे हैं। वहीं चरगाड़खड्ड, सुइनाड़ खड्ड, बसाया, गड़ेथा, स्यारलीखड्ड में बने दो-दो, सैंजाड़खड्ड, भंजरा, डिमऊ और सिमोग खड्ड में बनी एक-एक पुलिया क्षतिग्रस्त है।
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कालसी प्रखंड में छह साल पहले क्षतिग्रस्त हुए पांच पुल और 17 पुलियाओं की अभी तक मरम्मत नहीं हो पाई है। जिससे क्षेत्र के लोगों इस बार भी बरसात में मुख्य मार्ग और खेतों तक पहुंचने में खासी मशक्कत करनी होगी। उन्हें अपने खेतों और मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए तीन से चार किमी अतिरिक्त दूरी नापनी होगी।
क्षेेत्र में करीब पांच पैदल पुल और 17 पुलियाएं वर्ष 2013 से क्षतिग्रस्त हैं। छह साल बीतने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं की जा सकी हैं जबकि, ये पैदल पुल और पुलियाएं ग्रामीण अंचलों की अंदरूनी कनेक्टिविटी की रीढ़ मानी जाती हैं। ऐसे में इस साल भी बरसात में जब नदियों और खड्डों में जल स्तर बढ़ेगा तो लोगों को खेतों और मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। जड़वाला के संतन सिंह राठौर, पंजिया के नारायण सिंह, साहिया छानी के सतपाल राय का कहना है कि पुलियाओं के क्षतिग्रस्त होने से बरसात के दौरान उन्हें खेतों तक पहुंचने के लिए तीन से चार किमी की दूरी नापकर खेतों और दूसरे तक पहुंचना होता है। बरसात में नदी और खड्ड में पानी बढ़ने से अस्थायी पुल बह जाते हैं। कहा लंबे समय से वह पुलियाओं मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं देता।
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ये पुल और पुलियाएं हैं क्षतिग्रस्त
अमलावा नदी में सेवनाछानी, जड़वाल, शंभू की चौकी, साहिया छानी और तारलीगाड के पास बने पुल जहां मरम्मत की राह देख रहे हैं। वहीं चरगाड़खड्ड, सुइनाड़ खड्ड, बसाया, गड़ेथा, स्यारलीखड्ड में बने दो-दो, सैंजाड़खड्ड, भंजरा, डिमऊ और सिमोग खड्ड में बनी एक-एक पुलिया क्षतिग्रस्त है।
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