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पॉलीटेक्नीक के छात्रों ने बनाई हाथ के इशारों पर चलने वाली कार
Updated Wed, 09 May 2018 10:52 PM IST
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राजीव खत्री
श्रीनगर। राजकीय पॉलीटेक्निक के इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के छात्रों ने हाथ के इशारों से चलने वाली कार बनाई है। तीन हजार रुपये लागत की यह कार छह माह में तैयार की गई है। छात्रों का दावा है कि इस तकनीक को खतरनाक कार्य करने वाली जेसीबी जैसी मशीनों में प्रयोग किया जा सकता है, ताकि कार्य के दौरान मानव क्षति को रोका जा सके।
यहां राजकीय पॉलीटेक्निक में इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र विपिन, दीपक, शुभम चौधरी, हिमांशु सती, शिवम असवान, मो. अजहरूदीन ने छह माह की कड़ी मेहनत से हाथ के इशारों से चलने वाली कार तैयार की है। कार को नियंत्रित करने के लिए गलब्स (दस्ताने) पर ट्रांसमीटर लगाया गया है। गलब्स को हाथ में पहन कर हाथ के इशारों से कार को किसी भी दिशा में चलाया जा सकता है, हालांकि कार की गति एक ही स्तर पर रहेगी। छात्र विपिन व हिमांशु का कहना है कि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा सकता है। छात्रों के इस मॉडल को संस्थान के शिक्षकों और छात्रों ने भी सराहा है।
ऐसे काम करती है कार
कार में एक्सक्लेरोमीटर, माइक्रो कंट्रोलर, इनकोडर व डिकोडर आईसी, मोटर ड्राइवर आईसी, रेडियो फ्रीक्वेंसी माड्यूल लगे हैं। इन उपकरणों की सहायता से यह कार चलती है। एक्सक्लेरोमीटर यह निर्देशित करता है कि कार को किस दिशा में चलना है। एक्सक्लेरोमीटर का निर्देश माइक्रो कंट्रोलर पर पहुंचता हैं। माइक्रो कंट्रोलर का साफ्टवेयर इस निर्देश के आधार पर कार को चलाएगा। गलब्स पर लगा रेडियो फ्रीक्वेंसी माड्यूल निर्देश को वातावरण में ट्रांसमिट करता है, जबकि कार पर लगा रिसीवर इस निर्देश को रिसीव करता है। इस तरह कार हाथ के इशारों से संचालित होती है।
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श्रीनगर। राजकीय पॉलीटेक्निक के इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के छात्रों ने हाथ के इशारों से चलने वाली कार बनाई है। तीन हजार रुपये लागत की यह कार छह माह में तैयार की गई है। छात्रों का दावा है कि इस तकनीक को खतरनाक कार्य करने वाली जेसीबी जैसी मशीनों में प्रयोग किया जा सकता है, ताकि कार्य के दौरान मानव क्षति को रोका जा सके।
यहां राजकीय पॉलीटेक्निक में इलेक्ट्रानिक इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र विपिन, दीपक, शुभम चौधरी, हिमांशु सती, शिवम असवान, मो. अजहरूदीन ने छह माह की कड़ी मेहनत से हाथ के इशारों से चलने वाली कार तैयार की है। कार को नियंत्रित करने के लिए गलब्स (दस्ताने) पर ट्रांसमीटर लगाया गया है। गलब्स को हाथ में पहन कर हाथ के इशारों से कार को किसी भी दिशा में चलाया जा सकता है, हालांकि कार की गति एक ही स्तर पर रहेगी। छात्र विपिन व हिमांशु का कहना है कि इस तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा सकता है। छात्रों के इस मॉडल को संस्थान के शिक्षकों और छात्रों ने भी सराहा है।
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ऐसे काम करती है कार
कार में एक्सक्लेरोमीटर, माइक्रो कंट्रोलर, इनकोडर व डिकोडर आईसी, मोटर ड्राइवर आईसी, रेडियो फ्रीक्वेंसी माड्यूल लगे हैं। इन उपकरणों की सहायता से यह कार चलती है। एक्सक्लेरोमीटर यह निर्देशित करता है कि कार को किस दिशा में चलना है। एक्सक्लेरोमीटर का निर्देश माइक्रो कंट्रोलर पर पहुंचता हैं। माइक्रो कंट्रोलर का साफ्टवेयर इस निर्देश के आधार पर कार को चलाएगा। गलब्स पर लगा रेडियो फ्रीक्वेंसी माड्यूल निर्देश को वातावरण में ट्रांसमिट करता है, जबकि कार पर लगा रिसीवर इस निर्देश को रिसीव करता है। इस तरह कार हाथ के इशारों से संचालित होती है।
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