फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति कठिन व संघर्षपूर्ण

औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति कठिन व संघर्षपूर्ण

Sat, 07 Apr 2018 10:48 PM IST
Updated Sat, 07 Apr 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति कठिन व संघर्षपूर्ण
श्रीनगर। देवभूमि विचार मंच एवं गढ़वाल विवि ने संयुक्त रूप से राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। औपनिवेशिक मानसिकता से भारतीय जनमानस को मुक्ति विषय पर गोष्ठी हुई, जिसमें वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ बनाम मैदान की विचारधारा समाप्त की जानी चाहिए।
विज्ञापन

शुक्रवार को चौरास परिसर में राष्ट्रीय गोष्ठी के मुख्य वक्ता जेएनयू के प्रो. मकरंद परांजपे ने कहा कि औपनिवेशिकता हमारे अंदर है। इसे हम ही समाप्त कर सकते हैं। इसके लिए हमें अपनी सोच में परिवर्तन करना होगा। मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान में 85 फीसदी से अधिक लोग औपनिवेशिक मानसिकता के हैं। हमें अपनी सोच में परिवर्तन लाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि शब्दों में सरलीकरण होना चाहिए। तभी औपनिवेशिकता से बचा जा सकता है। पहाड़ बनाम मैदान की विचारधारा भी समाप्त की जानी चाहिए। देवभूमि विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष डा. चैतन्य भंडारी ने गोष्ठी के उद्देश्य के बारे में बताया। संचालन डा. एसएस बिष्ट ने किया। कार्यक्रम में डीएसडब्ल्यू प्रो. सुरेखा डंगवाल, प्रो. डीआर पुरोहित, प्रो. सीएस बागड़ी, प्रो. एसएस नेगी, मोहन नैथानी, डा. सर्वेश उनियाल, महेश डोभाल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन



कालेजों में हो पत्रकारिता एवं जनसंचार विषय
श्रीनगर। पत्रकारिता एवं जनसंचार केंद्र के निदेशक प्रो. एआर डंगवाल ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल से विषय को उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में संचालित करने की मांग की है। प्रो. डंगवाल ने विधानसभा अध्यक्ष को ज्ञापन सौंप शीघ्र समस्या के निराकरण की मांग की।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed