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550 परिवारों को भेजा लाखों का बिल, हड़कंप

Sun, 25 Mar 2018 02:24 AM IST
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:24 AM IST
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550 परिवारों को भेजा लाखों का बिल, हड़कंप
ब्यूरो/ऋषिकेश। जल संस्थान की लापरवाही का खामियाजा उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है। मुनिकीरेती, तपोवन और स्वर्गाश्रम में करीब साढ़े पांच सौ परिवार सात वर्ष से सीवर सुविधा का उपयोग करते रहे, लेकिन जल संस्थान को इसका पता नहीं था। महकमा इन उपभोक्ताओं को वार्षिक सीवर कर बिल नहीं भेज रहा था। क्षेत्र में पेयजल और सीवर कनेक्शन के सर्वे में इस खामी का पता चला। लिहाजा, विभागीय स्तर से हुई इस चूक से अब इन सैकड़ों परिवारों को एकमुश्त सात साल का करीब साढ़े 13 लाख का बिल भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को हड़कंप मचा हुआ है।
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दरअसल, शनिवार को मुनिकीरेती नगर पालिका में डीएम टिहरी सोनिका के जनता दरबार में लोगों की समस्याएं सुनने के बाद एक बुजुर्ग महिला उनके पास वर्ष 2012 से लेकर अब तक का सीवर बिल एक साथ भेजे जाने की शिकायत लेकर पहुंची। डीएम ने जलकल अभियंता एवीएस रावत से इस बाबत जवाब-तलब किया, तो पता चला कि मुनिकीरेती, स्वर्गाश्रम और तपोवन क्षेत्र में सर्वे कराया गया था, जिसमें लगभग 550 परिवार ऐसे पाए गए, जिनका विभाग के सॉफ्टवेयर से रिकॉर्ड गायब हो गया था। सर्वे में दर्जनों अवैध सीवर कनेक्शन भी मिले। लिहाजा, विभाग ने अब संबंधित उपभोक्ताओं को सात साल के बकाया सीवर कर का एकमुश्त बिल भेजा है।
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जलकल अभियंता रावत ने बताया कि संबंधित क्षेत्र में जितने पेयजल कनेक्शन हैं, उसके सापेक्ष विभागीय रिकॉर्ड में सीवर कनेक्शनों की कमी सर्वे के दौरान सामने आई। कनेक्शनधारकों पर करीब 13 लाख रुपये का बकाया है। जिलाधिकारी ने पीड़ित महिला की शिकायत को सुनने के बाद जलकल अभियंता को किश्तों में बकाया धनराशि की वसूली के निर्देश दिए हैं।
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एनजीटी के चक्कर में लोगों की जान ले लोगे क्या
जनता दरबार के दौरान सीवर से जुड़ा मामला सामने आने पर डीएम सोनिका जलकल अभियंता पर ही बिफर गई। उन्होंने सवाल किया कि विभाग की गलती का खामियाजा लोग क्यों भुगतें। वह यह कहने से भी नहीं चूकीं कि आप एनजीटी के चक्कर में लोगों की जान ले लोगे क्या। उन्होंने मामले को गंभीर बताते हुए दोबारा ऐसी लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत भी दी है।


क्या कहते हैं अधिकारी
इसकी जांच होनी चाहिए कि इतना बिल बन भी रहा है, या नहीं। क्षेत्र के जिन लोगों तक बिल पहुंचे हैं, उनसे किश्तों में बकाया भुगतान कराया जाना चाहिए। इसमें कोई दोहराय नहीं है कि यह विभाग की कमी है। ऐसी चूक दोबारा नहीं होनी चाहिए।
-- सोनिका, डीएम, टिहरी
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