{"_id":"5ab6ba0c4f1c1b71778b749c","slug":"152192487710-vikas-nagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"जौनसार बावर में धूमधाम से मना आठो पर्व","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जौनसार बावर में धूमधाम से मना आठो पर्व
Updated Sun, 25 Mar 2018 02:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
चैत्र शुक्ल की अष्टमी तिथि पर जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में शनिवार को आठो पर्व की धूम रही। लोगों ने घरों में कुलदेवी की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की। बड़े बुजुर्गों ने देवी के नाम का उपवास रखा। जिसे देर शाम को पूजा-अर्चना के बाद खोला गया।
पूरे देश में जहां इन दिनों नवरात्र की धूम मची हुई है। वहीं जौनसार बावर क्षेत्र में शनिवार को आठो पर्व मनाया गया। सुबह से ही गांव स्थित कुलदेवी के मंदिरों में लोगों का आना-जाना लगा रहा। लोगों ने घरों में पूजा-अर्चना कर कुलदेवी का संस्मरण किया। देर शाम लोगों ने घरों में पुड़ी और हलवे का प्रसाद बनाकर व्रत खोला। खत कयलू के स्याणा संतराम चौहान, बावर के स्याणा नारायण सिंह ने बताया कि जौनसार बावर क्षेत्र में अष्टमी तिथि का खासा महत्व है। इस दिन घरों में बड़े-बुजुर्ग देवी मां के नाम का उपवास रखते हैं। लोक गीतों से कुलदेवी की उपासना की जाती है।
विज्ञापन
चैत्र शुक्ल की अष्टमी तिथि पर जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में शनिवार को आठो पर्व की धूम रही। लोगों ने घरों में कुलदेवी की आराधना कर सुख-समृद्धि की कामना की। बड़े बुजुर्गों ने देवी के नाम का उपवास रखा। जिसे देर शाम को पूजा-अर्चना के बाद खोला गया।
पूरे देश में जहां इन दिनों नवरात्र की धूम मची हुई है। वहीं जौनसार बावर क्षेत्र में शनिवार को आठो पर्व मनाया गया। सुबह से ही गांव स्थित कुलदेवी के मंदिरों में लोगों का आना-जाना लगा रहा। लोगों ने घरों में पूजा-अर्चना कर कुलदेवी का संस्मरण किया। देर शाम लोगों ने घरों में पुड़ी और हलवे का प्रसाद बनाकर व्रत खोला। खत कयलू के स्याणा संतराम चौहान, बावर के स्याणा नारायण सिंह ने बताया कि जौनसार बावर क्षेत्र में अष्टमी तिथि का खासा महत्व है। इस दिन घरों में बड़े-बुजुर्ग देवी मां के नाम का उपवास रखते हैं। लोक गीतों से कुलदेवी की उपासना की जाती है।
विज्ञापन