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पूर्व कर्मचारियों को नहीं मिली भिक्षा मांगने की अनुमति
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पूर्व कर्मचारियों को नहीं मिली भिक्षा मांगने की अनुमति
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एंबुलेंस सेवा 108 का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके के पूर्व कर्मचारियों को भिक्षा मांगने की अनुमति नहीं मिल सकी। उन्होंने आंदोलन की श्रंखला में भिक्षा मांगते हुए भी आंदोलन करने की रणनीति बनाई थी। इसके चलते कर्मचारी धरनास्थल पर ही जमे रहे। वहीं बुधवार को भी कई कांग्रेस नेताओं ने पहुंचकर कर्मचारियों को समर्थन दिया।
नई कंपनी में समायोजित करने की मांग को लेकर कंपनी के पूर्व कर्मचारी परेड ग्राउंड के पास धरना दे रहे हैं। सरकार का कोई फैसला न आने तक उन्होंने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। इस आंदोलन में प्रदेशभर के 717 कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। कर्मचारियों की इस लड़ाई में मंगलवार को दो पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी उपस्थिति दर्ज कराई थी। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जल्द कर्मचारियों के हित में फैसला लिया जाए।
इसके बाद बुधवार को कर्मचारियों ने शहर में भीख मांगकर आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की थी। इसके लिए बाकायदा उन्होंने पहले अनुमति लेनी चाही, लेकिन प्रशासन ने कर्मचारियों को आंदोलन की चेतावनी नहीं दी। इस पर कर्मचारी धरनास्थल पर ही शांतिपूर्वक आंदोलन करने लगे।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। एंबुलेंस सेवा 108 का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके के पूर्व कर्मचारियों को भिक्षा मांगने की अनुमति नहीं मिल सकी। उन्होंने आंदोलन की श्रंखला में भिक्षा मांगते हुए भी आंदोलन करने की रणनीति बनाई थी। इसके चलते कर्मचारी धरनास्थल पर ही जमे रहे। वहीं बुधवार को भी कई कांग्रेस नेताओं ने पहुंचकर कर्मचारियों को समर्थन दिया।
नई कंपनी में समायोजित करने की मांग को लेकर कंपनी के पूर्व कर्मचारी परेड ग्राउंड के पास धरना दे रहे हैं। सरकार का कोई फैसला न आने तक उन्होंने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। इस आंदोलन में प्रदेशभर के 717 कर्मचारी हिस्सा ले रहे हैं। कर्मचारियों की इस लड़ाई में मंगलवार को दो पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने भी उपस्थिति दर्ज कराई थी। उन्होंने सरकार से मांग की थी कि जल्द कर्मचारियों के हित में फैसला लिया जाए।
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इसके बाद बुधवार को कर्मचारियों ने शहर में भीख मांगकर आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की थी। इसके लिए बाकायदा उन्होंने पहले अनुमति लेनी चाही, लेकिन प्रशासन ने कर्मचारियों को आंदोलन की चेतावनी नहीं दी। इस पर कर्मचारी धरनास्थल पर ही शांतिपूर्वक आंदोलन करने लगे।
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