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दो साल बाद भी नहीं हो पाया नेशनल हाईवे का जीओ
Updated Fri, 05 Jan 2018 02:09 AM IST
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दो साल बाद भी नहीं हो पाया नेशनल हाईवे का जीओ
- केंद्र सरकार ने 2016 में लक्ष्मणझूला-कांडी रोड को दी थी सैद्घांतिक स्वीकृति
- पौड़ी जिले के पांच प्रखंडों के सैकड़ों गांवों को मिलनी थी सुविधा
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश। लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-रतबाढाब-सल्ट महादेव नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक स्वीकृति के करीब दो साल बाद भी केंद्र सरकार शासनादेश जारी नहीं कर पाई है, जिसके चलते राजमार्ग का विस्तारीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। उक्त मार्ग के नहीं बनने से पौड़ी जिले के पांच प्रखंडों के एक हजार से अधिक गांव व प्राचीन नीलकंठ धाम की यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालु सीधे तौर पर सुगम आवागमन की सुविधा से महरूम हैं।
केंद्र सरकार ने मार्च-2016 में स्टेट हाईवे नंबर-9 लक्ष्मणझूला-कांडी-रतबाढाब-धूमाकोट को नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी। बावजूद इसके करीब 22 माह बीतने के बाद भी मार्ग को एनएच घोषित किए जाने का शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। जिसके चलते पीडब्ल्यूडी नेशनल हाईवे विभाग द्वारा गत वर्ष 2017 में केंद्र सरकार को भेजा गया करीब 200 किलोमीटर लंबे लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-रतबाढाब-सल्ट महादेव राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माण कार्य के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
उक्त मार्ग से पौड़ी जिले के पांच विकासखंड यमकेश्वर, दुगड्डा, द्वारीखाल, जयहरीखाल आदि सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। जहां के लगभग एक हजार गांवों के लोगों को नेशनल हाईवे बनने से आवागमन की सुविधा मिलनी है। इतना ही नहीं तीर्थनगरी को पौराणिक नीलकंठ धाम से जोड़ने वाले इस मार्ग के विस्तारीकरण से वर्ष भर प्राचीन शिवालय के दर्शन को आने वाले एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को भी सुगम आवागमन का लाभ मिलना था।
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स्टेट हाईवे का भी नहीं हो पाया था निर्माण
ऋषिकेश। इस मार्ग के साथ जो रवैया पहले प्रदेश सरकार ने अपनाया केंद्र सरकार भी उसे ही दोहरा रही है। वर्ष 2006 में प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रतबाढाब-धूमाकोट मार्ग को स्टेट हाईवे का दर्जा दिया था, मगर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड को एसएच के मानक के अनुसार बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी दुगड्डा के प्रस्ताव को 10 वर्ष बाद भी मंजूरी नहीं दी गई। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने इस मार्ग को एनएच बनाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी, मगर करीब दो साल बीतने पर भी इसका शासनादेश जारी नहीं हो पाया है।
नाम का एनएच, कई जगह एमडीआर के मानक भी नहीं
ऋषिकेश। केंद्र सरकार द्वारा जिस लक्ष्मणझूला-कांडी-रतबाढाब-सल्ट महादेव मार्ग को एनएच का दर्जा दिया गया है, वह कई स्थानों पर नेशनल हाईवे तो दूर ओडीआर व एमडीआर के मानकों को भी पूरा नहीं करता। विभागीय मानकों के अनुसार एमडीआर की न्यूनतम चौड़ाई पांच मीटर और एनएच की न्यूनतम चौड़ाई नौ से 10 मीटर होनी चाहिए। मगर उक्त मार्ग कई स्थानों पर चार व साढ़े चार मीटर ही चौड़ा है। जिससे भारी वाहनों के आवागमन में खासी दिक्कतें पेश आती हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
लक्ष्मणझूला-रतबाढाब-सल्ट महादेव मार्ग को मार्च 2016 में एनएच की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्रालय की ओर से विभाग से इसका इस्टीमेट मांगा गया था। गत वर्ष केंद्र को करीब 200 किमी. लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रारंभिक निर्माण कार्य के लिए करीब 100 करोड़ का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, मगर अभी तक सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग का शासनादेश जारी नहीं किया है। लिहाजा उक्त प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं मिल पाई है।
- हरिओम शर्मा, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी एनएच, उत्तराखंड।
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- केंद्र सरकार ने 2016 में लक्ष्मणझूला-कांडी रोड को दी थी सैद्घांतिक स्वीकृति
- पौड़ी जिले के पांच प्रखंडों के सैकड़ों गांवों को मिलनी थी सुविधा
हेमवती नंदन भट्ट
ऋषिकेश। लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-रतबाढाब-सल्ट महादेव नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक स्वीकृति के करीब दो साल बाद भी केंद्र सरकार शासनादेश जारी नहीं कर पाई है, जिसके चलते राजमार्ग का विस्तारीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पा रही है। उक्त मार्ग के नहीं बनने से पौड़ी जिले के पांच प्रखंडों के एक हजार से अधिक गांव व प्राचीन नीलकंठ धाम की यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालु सीधे तौर पर सुगम आवागमन की सुविधा से महरूम हैं।
केंद्र सरकार ने मार्च-2016 में स्टेट हाईवे नंबर-9 लक्ष्मणझूला-कांडी-रतबाढाब-धूमाकोट को नेशनल हाईवे की सैद्धांतिक स्वीकृति दी थी। बावजूद इसके करीब 22 माह बीतने के बाद भी मार्ग को एनएच घोषित किए जाने का शासनादेश जारी नहीं हो पाया है। जिसके चलते पीडब्ल्यूडी नेशनल हाईवे विभाग द्वारा गत वर्ष 2017 में केंद्र सरकार को भेजा गया करीब 200 किलोमीटर लंबे लक्ष्मणझूला-दुगड्डा-रतबाढाब-सल्ट महादेव राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्माण कार्य के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई है।
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उक्त मार्ग से पौड़ी जिले के पांच विकासखंड यमकेश्वर, दुगड्डा, द्वारीखाल, जयहरीखाल आदि सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। जहां के लगभग एक हजार गांवों के लोगों को नेशनल हाईवे बनने से आवागमन की सुविधा मिलनी है। इतना ही नहीं तीर्थनगरी को पौराणिक नीलकंठ धाम से जोड़ने वाले इस मार्ग के विस्तारीकरण से वर्ष भर प्राचीन शिवालय के दर्शन को आने वाले एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को भी सुगम आवागमन का लाभ मिलना था।
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स्टेट हाईवे का भी नहीं हो पाया था निर्माण
ऋषिकेश। इस मार्ग के साथ जो रवैया पहले प्रदेश सरकार ने अपनाया केंद्र सरकार भी उसे ही दोहरा रही है। वर्ष 2006 में प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने लक्ष्मणझूला-कांडी-दुगड्डा-रतबाढाब-धूमाकोट मार्ग को स्टेट हाईवे का दर्जा दिया था, मगर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड को एसएच के मानक के अनुसार बनाने के लिए पीडब्ल्यूडी दुगड्डा के प्रस्ताव को 10 वर्ष बाद भी मंजूरी नहीं दी गई। वर्ष 2016 में केंद्र सरकार ने इस मार्ग को एनएच बनाने की सैद्धांतिक स्वीकृति दी, मगर करीब दो साल बीतने पर भी इसका शासनादेश जारी नहीं हो पाया है।
नाम का एनएच, कई जगह एमडीआर के मानक भी नहीं
ऋषिकेश। केंद्र सरकार द्वारा जिस लक्ष्मणझूला-कांडी-रतबाढाब-सल्ट महादेव मार्ग को एनएच का दर्जा दिया गया है, वह कई स्थानों पर नेशनल हाईवे तो दूर ओडीआर व एमडीआर के मानकों को भी पूरा नहीं करता। विभागीय मानकों के अनुसार एमडीआर की न्यूनतम चौड़ाई पांच मीटर और एनएच की न्यूनतम चौड़ाई नौ से 10 मीटर होनी चाहिए। मगर उक्त मार्ग कई स्थानों पर चार व साढ़े चार मीटर ही चौड़ा है। जिससे भारी वाहनों के आवागमन में खासी दिक्कतें पेश आती हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
लक्ष्मणझूला-रतबाढाब-सल्ट महादेव मार्ग को मार्च 2016 में एनएच की सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद केंद्र सरकार के राजमार्ग मंत्रालय की ओर से विभाग से इसका इस्टीमेट मांगा गया था। गत वर्ष केंद्र को करीब 200 किमी. लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रारंभिक निर्माण कार्य के लिए करीब 100 करोड़ का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, मगर अभी तक सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग का शासनादेश जारी नहीं किया है। लिहाजा उक्त प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं मिल पाई है।
- हरिओम शर्मा, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी एनएच, उत्तराखंड।