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पर्वतीय क्षेत्रों में विकासित करनी होगी स्कील डेवलपमेंट र विज्ञान की नई तकनीक
Updated Mon, 11 Dec 2017 10:49 PM IST
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गोपेश्वर। इंजीनियरिंग कॉलेज गोपेश्वर में सोमवार से राष्ट्रीय प्रगतिशील विज्ञान व इंजीनियरिंग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज हुआ। श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति प्रोफेसर यूएस रावत ने सम्मेलन का शुभारंभ किया और पलायन रोकने के लिए नई तकनीकों को विकसित करने पर जोर दिया।
सम्मेलन में श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्कील डेवलेपमेंट और विज्ञान की नई तकनीक विकसित करनी होगी। इस दूरस्थ क्षेत्र में ऐसे कार्यक्रमों से भावी इंजीनियरों के तकनीकी ज्ञान में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि उद्यान और कृषि के क्षेत्र में भी नई टेक्नोलॉजी विकसित कर पलायन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। पुराने घराटों में नई तकनीक विकसित करनी चाहिए। पीजी कॉलेज गोपेश्वर के प्राचार्य प्रोफेसर केएल मालगुड़ी ने कहा कि विदेशों में हमारे पौराणिक शास्त्र, संस्कृति और धार्मिकता पर शोध चल रहा है, लेकिन हम स्थानीय स्तर पर उन्हें विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। आज विज्ञान और नई-नई तकनीक के विस्तार की जरूरत है। इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक केके मेर ने कहा कि भावी इंजीनियरों की ओर से तकनीकी शिक्षा को ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आता है। मंगलवार को अन्य राज्यों से भी इंजीनियर सम्मेलन में शामिल होंगे और अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
इस मौके पर सम्मेलन के समन्वयक विश्वनाथ बिजल्वाण, प्रवीण वेतियल, प्रो. डीएस नेगी, प्रवीण, जितेंद्र रौथाण, डा. अरविंद भट्ट, डा. दिनेश सती, डा. बीसी शाह, प्रधान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी आदि मौजूद थे।
सम्मेलन में श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति प्रो. रावत ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में स्कील डेवलेपमेंट और विज्ञान की नई तकनीक विकसित करनी होगी। इस दूरस्थ क्षेत्र में ऐसे कार्यक्रमों से भावी इंजीनियरों के तकनीकी ज्ञान में बढ़ोत्तरी होगी। उन्होंने कहा कि उद्यान और कृषि के क्षेत्र में भी नई टेक्नोलॉजी विकसित कर पलायन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है। पुराने घराटों में नई तकनीक विकसित करनी चाहिए। पीजी कॉलेज गोपेश्वर के प्राचार्य प्रोफेसर केएल मालगुड़ी ने कहा कि विदेशों में हमारे पौराणिक शास्त्र, संस्कृति और धार्मिकता पर शोध चल रहा है, लेकिन हम स्थानीय स्तर पर उन्हें विकसित करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। आज विज्ञान और नई-नई तकनीक के विस्तार की जरूरत है। इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक केके मेर ने कहा कि भावी इंजीनियरों की ओर से तकनीकी शिक्षा को ग्रामीणों तक पहुंचाया जा रहा है। ऐसे आयोजनों से तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आता है। मंगलवार को अन्य राज्यों से भी इंजीनियर सम्मेलन में शामिल होंगे और अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत करेंगे।
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इस मौके पर सम्मेलन के समन्वयक विश्वनाथ बिजल्वाण, प्रवीण वेतियल, प्रो. डीएस नेगी, प्रवीण, जितेंद्र रौथाण, डा. अरविंद भट्ट, डा. दिनेश सती, डा. बीसी शाह, प्रधान संगठन के प्रदेश प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी आदि मौजूद थे।
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