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चमोली जिले के 315 विद्यालयों के संचालन पर आरटीई का शिकंजा
Updated Fri, 24 Nov 2017 10:22 PM IST
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गोपेश्वर। चमोली जिले में संचालित 315 निजी विद्यालय बिना मान्यता (शैक्षणिक सत्र 2017-18) के चल रहे हैं। इन 315 निजी विद्यालयों में से एक भी विद्यालय आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के मानक पूरे नहीं कर पाया है। अब शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालय संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है। इससे इन विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब 35000 बच्चों के भविष्य पर संकट मंडरा गया है।
वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था। इसके तहत नर्सरी से लेकर इंटरमीडिएट तक निजी विद्यालयों के संचालन के लिए मानक तय किए गए थे। इन मानकों को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को पांच वर्ष का समय दिया। यह समय सीमा चालू वर्ष के 31 मार्च को समाप्त हो गई है। लिहाजा अब शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों को मान्यता देने से साफ इंकार कर दिया है। साथ ही मानक पूरा न होने पर विद्यालयों का संचालन बंद करने का फरमान भी दे दिया है। इससे विद्यालय संचालकों में हड़कंप मचा है। चालू शिक्षण सत्र अप्रैल माह से जिले के निजी विद्यालय बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन विद्यालयों में अध्ययनरत करीब पैंतीस हजार बच्चों के भविष्य पर भी संकट गहरा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) नरेश कुमार हल्दियानी का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन को कई बार मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन एक भी विद्यालय मानक पर खरा नहीं उतर रहा है। अब ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
कोट
शिक्षा विभाग के अधीन सरकारी प्राथमिक से लेकर इंटर स्तर तक के विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब है। हमने आरटीई के मानकों में शिथिलीकरण की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री से भी निजी विद्यालयों के मान्यता प्रकरण को सुलझाने की गुहार लगाई गई है। - अरुण मैठाणी, प्रदेश प्रवक्ता, निजी विद्यालय संगठन, उत्तराखंड।
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इंसेट
मान्यता के लिए ये मानक करने होंगे पूरे
- विद्यालय में बालक, बालिका और विद्यालय स्टाफ के लिए अलग-अलग शौचालय।
- विद्यालय का खेल मैदान।
- मान्यता के लिए चालान हिंदी में लगाने के लिए दस हजार व अंग्रेजी के लिए पचास हजार रुपये जमा करने होंगे।
- विद्यालय में शौचालय के साथ ही पानी, बिजली की सुविधा।
- कक्षा-कक्षों का निर्माण मानक (छह गुणा आठ) के अनुसार हो।
- टीईटी प्रथम व द्वितीय उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति।
- विद्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर पूर्ण होना चाहिए।
वर्ष 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू हुआ था। इसके तहत नर्सरी से लेकर इंटरमीडिएट तक निजी विद्यालयों के संचालन के लिए मानक तय किए गए थे। इन मानकों को पूरा करने के लिए शिक्षा विभाग ने विद्यालय प्रबंधन को पांच वर्ष का समय दिया। यह समय सीमा चालू वर्ष के 31 मार्च को समाप्त हो गई है। लिहाजा अब शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों को मान्यता देने से साफ इंकार कर दिया है। साथ ही मानक पूरा न होने पर विद्यालयों का संचालन बंद करने का फरमान भी दे दिया है। इससे विद्यालय संचालकों में हड़कंप मचा है। चालू शिक्षण सत्र अप्रैल माह से जिले के निजी विद्यालय बिना मान्यता के चल रहे हैं। इन विद्यालयों में अध्ययनरत करीब पैंतीस हजार बच्चों के भविष्य पर भी संकट गहरा गया है। जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) नरेश कुमार हल्दियानी का कहना है कि विद्यालय प्रबंधन को कई बार मानकों को पूरा करने के निर्देश दिए गए, लेकिन एक भी विद्यालय मानक पर खरा नहीं उतर रहा है। अब ऐसे स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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कोट
शिक्षा विभाग के अधीन सरकारी प्राथमिक से लेकर इंटर स्तर तक के विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब है। हमने आरटीई के मानकों में शिथिलीकरण की मांग उठाई है। मुख्यमंत्री से भी निजी विद्यालयों के मान्यता प्रकरण को सुलझाने की गुहार लगाई गई है। - अरुण मैठाणी, प्रदेश प्रवक्ता, निजी विद्यालय संगठन, उत्तराखंड।
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मान्यता के लिए ये मानक करने होंगे पूरे
- विद्यालय में बालक, बालिका और विद्यालय स्टाफ के लिए अलग-अलग शौचालय।
- विद्यालय का खेल मैदान।
- मान्यता के लिए चालान हिंदी में लगाने के लिए दस हजार व अंग्रेजी के लिए पचास हजार रुपये जमा करने होंगे।
- विद्यालय में शौचालय के साथ ही पानी, बिजली की सुविधा।
- कक्षा-कक्षों का निर्माण मानक (छह गुणा आठ) के अनुसार हो।
- टीईटी प्रथम व द्वितीय उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की नियुक्ति।
- विद्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर पूर्ण होना चाहिए।