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30 दिसंबर तक संपति कर नहीं दिया तो भरना पड़ेगा 12 प्रतिशत ब्याज
Updated Fri, 27 Oct 2017 10:07 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
संपत्ति कर जमा करने में हीलाहवाली भवन स्वामियों को भारी पड़ने जा रही है। नगर निगम ने संपत्ति कर जमा करने के लिए आखिरी तिथि 30 दिसंबर तय की है। इस अवधि के अंदर स्वनिर्धारित संपत्ति टैक्स जमा नहीं करने वाले भवन स्वामियों से 12 फीसदी ब्याज के साथ संपत्ति कर वसूला जाएगा।
नगर निगम संपत्ति कर निर्धारण की स्वकर निर्धारण नियमावली लागू होने के बाद तीन साल में केवल 32 हजार फार्म ही घर-घर पहुंचा पाया है। वर्ष 2015 से लागू स्वकर निर्धारण नियमावली लागू है। जिसके तहत भवन स्वामी को स्वयं अपनी संपत्ति का टैक्स निर्धारण कर जमा करने का अधिकार है। 15 साल से संपत्ति कर नहीं देने वाले भवन स्वामी अब भी संपत्ति कर देने का तैयार नहीं हैं। इसका पता इससे चलता है कि जिन 32 हजार भवन स्वामियों ने स्वकर फार्म लिया था उनमें से 10 हजार ने भी फार्म जमा ही नहीं किया है। इस स्थिति को बदलने के लिए नगर आयुक्त नितिन सिंह भदौरिया ने अब सख्ती करनी शुरू कर दी है। जिसके तहत उन्होंने 30 दिसंबर तक संपत्ति कर जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की है।
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नगर निगम करेगा संपत्ति का मूल्याकंन
जो भवन स्वामी स्वकर निर्धारण नियमावली के अनुसार अपना संपत्ति कर निर्धारित कर जमा नहीं करेंगे, उनकी संपत्ति का मूल्यांकन अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर करेंगे। नगर निगम की ओर से निर्धारित टैक्स के विरुद्ध सुनवाई का प्रावधान नहीं होने पर भवन स्वामियों को संपत्ति कर जमा कराना ही होगा। सबसे अधिक दिक्कत व्यावसायिक संपत्तियों के मालिकों को होने वाली है। जो राजनीतिक रसूख से टैक्स देने से बचते रहे हैं। उन्हें तीन साल का टैक्स एक साथ जमा करना पड़ेगा।
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अखाड़ों व आश्रमों पर स्थिति साफ नहीं
अखाड़ों व आश्रमों पर संपत्ति कर को लेकर शासन ने स्थिति साफ नहीं है। मुख्यमंत्री ने धार्मिक संपत्ति अखाड़ों व आश्रमों पर संपत्ति कर नहीं लगाने की घोषणा तो की थी, परंतु इस संबंध में अब तक शासन से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। जिससे नगर निगम का संपत्ति विभाग इस दुविधा में है कि धार्मिक संपत्तियों में जो व्यावसायिक हैं उस पर टैक्स किस आधार पर लिया जाना है। कनखल और हरिद्वार क्षेत्र में सबसे अधिक व्यावसायिक केंद्र अखाड़ों व आश्रमों की संपत्तियों में संचालित हैं। स्थिति स्पष्ट नहीं होने निगम को करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। नगर आयुक्त ने संपत्ति विभाग के अधिकारियों को इन संपत्तियों का मूल्याकंन करने को कहा है, ताकि संपत्ति कर माफ करने के सापेक्ष उसकी भरपाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा सके।