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जौनसार और सहारनपुर की मंडियों की रौनक बढ़ा रहे चमोली की राजमा व आलू
Updated Fri, 20 Oct 2017 10:46 PM IST
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गोपेश्वर। इस साल अगस्त व सितंबर में हुई अच्छी बारिश से चमोली जिले की निजमूला और उर्गम घाटी में राजमा, आलू और चौलाई की अच्छी पैदावार हुई है। इन दिनों जौनसार, सहारनपुर, रुड़की और नजीबाबाद की मंडियों से व्यापारी जिले में इन उत्पादों को खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।
चमोली जिले में अधिकांश काश्तकार नकदी फसलों में खाद के लिए गोबर का प्रयोग करते हैं। इन फसलों को मैदानी क्षेत्र के व्यवसायी भी हाथों हाथ लेते हैं। निजमूला घाटी के आलू व्यवसायी दयाल सिंह, हुकम सिंह, मदन सिंह, विक्रम सिंह का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी होने से फसलों का उत्पादन आशा के अनुरूप हुआ है। तैयार फसलों को स्थानीय बाजार के साथ ही मैदानी क्षेत्र की मंडियों में भेजा जाता है। घाट ब्लॉक से आलू का व्यापार कर रहे कनोल गांव निवासी पार सिंह बिष्ट ने कहा कि वे अभी तक स्थानीय बाजार में करीब पचास क्विंटल आलू बेच चुके हैं। उर्गम घाटी के काश्तकार मकर सिंह का कहना है कि बीते वर्ष तीन क्विंटल राजमा का उत्पादन हुआ, इस बार बारिश अच्छी होने से पांच क्विंटल राजमा का उत्पादन हुआ, जिसे मैदानी क्षेत्र की मंडियों के लिए भेजा गया है। जोशीमठ प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि सरकार की मंडुवा, चौलाई, राजमा के साथ ही स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन के लिए प्रस्तावित बोनस योजना से भी काश्तकारों में खेती को लेकर उत्साह है। जैविक खेती के मास्टर ट्रेनर भुवनेश पुरोहित का कहना है कि दशोली, जोशीमठ और घाट क्षेत्रों में अधिकांश ग्रामीण जैविक खेती करते हैं।
गांवों में ही बनाए हैं विपणन केंद्र
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चौलाई, आलू, राजमा, मंडुवा, झंगोरा, लाल धान, उड़द, गहत, तोर, सोयाबीन, रेंस, काले भट्ट, के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादित उगल और फाफर की अच्छी पैदावार होती है। इन्हें बेचने के लिए क्षेत्र के ही गांवों में विपणन केंद्र बनाए जाते हैं। ग्रामीणों को बाजार भाव के अनुसार ही उत्पादित फसलों का भुगतान भी हाथों हाथ कर दिया जाता है।
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चमोली में उत्पादित फल, सब्जियों के विपणन को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। घाट और देवाल क्षेत्र में कोल्ड स्टोर की व्यवस्था की जा रही है। अगले साल तक दोनों जगहों पर कोल्ड स्टोर स्थापित कर दिया जाएगा। काश्तकारों को उनकी मेहनत का पूरा दाम दिलवाया जाएगा। - मगन लाल, विधायक, थराली विधानसभा, चमोली।
चमोली जिले में अधिकांश काश्तकार नकदी फसलों में खाद के लिए गोबर का प्रयोग करते हैं। इन फसलों को मैदानी क्षेत्र के व्यवसायी भी हाथों हाथ लेते हैं। निजमूला घाटी के आलू व्यवसायी दयाल सिंह, हुकम सिंह, मदन सिंह, विक्रम सिंह का कहना है कि इस बार बारिश अच्छी होने से फसलों का उत्पादन आशा के अनुरूप हुआ है। तैयार फसलों को स्थानीय बाजार के साथ ही मैदानी क्षेत्र की मंडियों में भेजा जाता है। घाट ब्लॉक से आलू का व्यापार कर रहे कनोल गांव निवासी पार सिंह बिष्ट ने कहा कि वे अभी तक स्थानीय बाजार में करीब पचास क्विंटल आलू बेच चुके हैं। उर्गम घाटी के काश्तकार मकर सिंह का कहना है कि बीते वर्ष तीन क्विंटल राजमा का उत्पादन हुआ, इस बार बारिश अच्छी होने से पांच क्विंटल राजमा का उत्पादन हुआ, जिसे मैदानी क्षेत्र की मंडियों के लिए भेजा गया है। जोशीमठ प्रधान संगठन के ब्लॉक अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह नेगी का कहना है कि सरकार की मंडुवा, चौलाई, राजमा के साथ ही स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन के लिए प्रस्तावित बोनस योजना से भी काश्तकारों में खेती को लेकर उत्साह है। जैविक खेती के मास्टर ट्रेनर भुवनेश पुरोहित का कहना है कि दशोली, जोशीमठ और घाट क्षेत्रों में अधिकांश ग्रामीण जैविक खेती करते हैं।
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गांवों में ही बनाए हैं विपणन केंद्र
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चौलाई, आलू, राजमा, मंडुवा, झंगोरा, लाल धान, उड़द, गहत, तोर, सोयाबीन, रेंस, काले भट्ट, के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में उत्पादित उगल और फाफर की अच्छी पैदावार होती है। इन्हें बेचने के लिए क्षेत्र के ही गांवों में विपणन केंद्र बनाए जाते हैं। ग्रामीणों को बाजार भाव के अनुसार ही उत्पादित फसलों का भुगतान भी हाथों हाथ कर दिया जाता है।
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चमोली में उत्पादित फल, सब्जियों के विपणन को बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। घाट और देवाल क्षेत्र में कोल्ड स्टोर की व्यवस्था की जा रही है। अगले साल तक दोनों जगहों पर कोल्ड स्टोर स्थापित कर दिया जाएगा। काश्तकारों को उनकी मेहनत का पूरा दाम दिलवाया जाएगा। - मगन लाल, विधायक, थराली विधानसभा, चमोली।