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हाईकोर्ट ने खोखा दुकानदारों के विस्थापन की गेंद सरकार के पाले में डाली
Updated Sat, 07 Oct 2017 10:55 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने खोखा दुकानदारों को फिर से देवपुरा से रेलवे रोड पर पुरुषार्थी मार्केट तक नाले पर विस्थापन संबंधी याचिकाओं को निस्तारित कर दिया है। हाईकोर्ट ने गेंद राज्य सरकार के पाले में डालते हुए नगर निगम बोर्ड की ओर से जून 2016 में पारित अलाटमेंट के प्रस्ताव पर छह सप्ताह में नीतिगत निर्णय लेने का आदेश दिया है।
नाले पर अतिक्रमण कराकर खोखा बाजार स्थापित कराने के भाजपाई नगर निगम बोर्ड के बहुचर्चित प्रस्ताव के खिलाफ नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष उपेंद्र कुमार ने हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया था। जिस पर हाईकोर्ट ने नाले पर दुकानों के अलाटमेंट की नगर निगम की प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। याची के अधिवक्ता वीएस अधिकारी ने हाईकोर्ट से फोन पर बताया कि शनिवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका निस्तारित कर दी है। न्यायालय ने सरकार को नगर निगम के अलाटमेंट संबंधी प्रस्ताव पर छह सप्ताह में नीतिगत निर्णय लेने का आदेश दिया है। उनका कहना है कि सरकार भी नाले पर अतिक्रमण कराने के बोर्ड के प्रस्ताव को नहीं मान सकती है। हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है कि कोई भी निर्णय लेते वक्त सुप्रीमकोर्ट के अतिक्रमण के संबंधी आदेश को भी ध्यान में रखा जाए। नेता प्रतिपक्ष उपेंद्र कुमार की दलील थी कि नगर निगम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नाले से हटाए गए खोखा दुकानदारों को स्थायी विकल्प दे और नाले पर अतिक्रमण न कराए। उनका आरोप था कि भाजपा का बोर्ड उजाड़े गए लोगों के साथ धोखा कर रहा है। उनकी योजना सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में नाले पर भाजपा कार्यकर्ता के खोखे लगवाकर अतिक्रमण कराने की है। उन्होंने 260 कार्यकर्ताओं की सूची भी बना ली थी।
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आदेश से खोखे वालों में निराशा
चित्रा टाकीज रेलवे रोड के नाले जिला प्रशासन की ओर से 2010 की बाढ़ में जलभराव के बाद में बलपूर्वक नाले से हटाए गए खोखा दुकानदारों में हाईकोर्ट के फैसले से निराशा है। उन्हें उम्मीद थी शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, मेयर मनोज गर्ग तथा उनके सलाहकार सुभाष चंद की सलाह पर नगर निगम बोर्ड ने स्थायी विकल्प मिलने तक नाले पर ही अस्थायी रूप से खोखे लगवाने का जो प्रस्ताव पारित किया है, हाईकोर्ट उसको हरी झंडी दे देगा, परंतु ऐसा नहीं हुआ है। लघु व्यापारिक समिति के अध्यक्ष चोखेलाल ने बताया कि फैसला उनके आशा के अनुरूप नहीं है और अब उन्हें फिर से शासन स्तर पर चक्कर लगाने पडे़ंगे। उनकी मांग है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार नगर निगम 115 खोखा दुकानदारों को तत्काल विकल्प दे।
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सरकार 45 दिन में निर्णय ले
मेयर मनोज गर्ग के मुख्य सलाहकार सुभाष चंद ने बताया कि हाईकोर्ट ने पीआईएल निस्तारित कर दी है। सरकार को 45 दिन के अंदर उचित कार्रवाई का आदेश दिया है। उनका मानना है कि सरकार के स्तर से कुछ होने की उम्मीद कम ही है और अंतत: नगर निगम को स्थगित आवंटन की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ेगी।
खोखा दुकानदारों के निशाने पर भाजपाई
हरिद्वार। नाले पर खोखा बाजार सजाने की नगर निगम के भाजपाई पार्षदों और अन्य नेताओं की योजना को हाईकोर्ट के निर्णय से बड़ा झटका लगा है। नगर निगम बोर्ड से प्रस्ताव कराने के बाद उन्होंने 260 लोगों से मई, जून और जुलाई 2016 के तीन महीनों का एडवांस किराया भी जमा करा दिया था। प्रत्येक खोखाधारक से 500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से तीन महीने का 1500 रुपये जमा कराए गए हैं। इस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति से 1600 रुपये के हिसाब 4 लाख 16 हजार रुपये एक साल पहले जून में जमा करा दिए गए थे। नाले पर खोखा लगाने का अग्रिम किराया जमा करने वालों में वे उजाड़े गए खोखाधारक भी शामिल हैं जिन्हें सुप्रीमकोर्ट के आदेश पर स्थायी विकल्प दिया जाना है। मेयर मनोज गर्ग के नेतृत्व में सलाहकार सुभाष चंद, पार्षद राजेश शर्मा आदि ने लोगों को आश्वस्त किया था कि अग्रिम किराया जमा कराते ही नाले पर खोखा लगाने के लिए जगह आवंटन की प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। नाले पर जिन 260 लोगों को खोखे लगाने थे उनमें नगर निगम के 27 पार्षदों की भागीदारी भी होनी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने खोखा दुकानदारों का पुनर्वास करने के लिए सरकार को आदेश दिया है।