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प्राकृतिक जल स्रोत भी देने लगे जबाव, ग्रामीणों को सताने लगी पेयजल की चिंता
Updated Sat, 30 Sep 2017 10:43 PM IST
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श्रीनगर। गांव के पास मौजूद प्राकृतिक जल स्रोत सूखने की कगार पर है। ऐसे में ग्रामीणों को अब पेयजल समस्या की चिंता सताने लगी है। कपरोली के ग्रामीणों ने समय रहते जल संस्थान से क्षतिग्रस्त पेयजल योजना की मरम्मत की मांग की है।
विकास खंड कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत कपरोली की पेयजल योजना दो माह से सूखी पड़ी है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य शूरबीर सिंह ने बताया ग्रामीण बारिश से रिर्चाज हुए प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझा रहे है, लेकिन विगत कुछ दिनों से गांव के पास इन प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी पानी कम होने लगा है। कहा कि विभाग की ओर से अगर समय पर योजना की मरम्मत नहीं करवाई गई तो ग्रामीणों को पानी के लिए दो से तीन किमी की दूरी नापनी पड़ेगी। ग्रामीण राजेंद्र सिंह, चंद्र सिंह, जगत सिंह आदि ने जल संस्थान से शीघ्र योजना पर पानी की आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। वहीं अधिशासी अभियंता गढ़वाल जल संस्थान देवप्रयाग आशीष भट्ट ने कहा कि योजना के क्षतिग्रस्त होने की मेरे पास सूचना नहीं है। अगर गांव में पानी की समस्या है तो शीघ्र ही उसका निराकरण किया जाएगा।
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विकास खंड कीर्तिनगर के ग्राम पंचायत कपरोली की पेयजल योजना दो माह से सूखी पड़ी है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य शूरबीर सिंह ने बताया ग्रामीण बारिश से रिर्चाज हुए प्राकृतिक जल स्रोतों से प्यास बुझा रहे है, लेकिन विगत कुछ दिनों से गांव के पास इन प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी पानी कम होने लगा है। कहा कि विभाग की ओर से अगर समय पर योजना की मरम्मत नहीं करवाई गई तो ग्रामीणों को पानी के लिए दो से तीन किमी की दूरी नापनी पड़ेगी। ग्रामीण राजेंद्र सिंह, चंद्र सिंह, जगत सिंह आदि ने जल संस्थान से शीघ्र योजना पर पानी की आपूर्ति शुरू करने की मांग की है। वहीं अधिशासी अभियंता गढ़वाल जल संस्थान देवप्रयाग आशीष भट्ट ने कहा कि योजना के क्षतिग्रस्त होने की मेरे पास सूचना नहीं है। अगर गांव में पानी की समस्या है तो शीघ्र ही उसका निराकरण किया जाएगा।
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