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फाइलों में सिमटी आयुष ग्राम की योजना
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:41 AM IST
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देवाल। ब्लाक के घेस गांव को आयुष ग्राम बनाए जाने की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई है। वर्ष 2013 में यहां आयुष ग्राम बनाए जाने की बात की गई, जिसके बाद ग्रामीणों ने विभाग को अपनी 80 नाली भूमि भी दी, लेकिन चार साल बाद भी मामला फाइलों में ही लटका रह गया।
ब्लाक का घेस गांव 11500 फीट ऊंचाई पर बसा है। यहां ग्रामीण डेढ़ दशक से जड़ी-बूटी का उत्पादन कर रहे हैं। घेस के पूर्व प्रधान केशर सिंह बिष्ट तथा गढ़वाल विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन से यह प्रदेश का पहला जड़ी-बूटी उत्पादन गांव बना। ग्रामीणों ने पहली बार वर्ष 2005 में दिल्ली तथा रामनगर की कंपनियों को उत्पादित कुटकी बेची। इससे उत्साहित गांव के किसानों ने अतीश, कूट, गंदरायण, जटामासी, कालाजीरा, भूतकेश धूप, वन तुलसी आदि जड़ी-बूटी का उत्पादन शुरू किया। वर्तमान समय में इस उत्पादन से घेस और हिमनी गांवों के करीब 120 परिवार जुड़े हैं और सालाना एक से दो लाख तक की आय अर्जित कर रहे हैं। घेस के आसपास हिमनी, बलाड़ तथा पिनाउ ग्राम पंचायत में कई जड़ी-बूटियों का अपार भंडार है, जिसे बढ़ावा देने के लिए यहां ग्रामीणों ने आयुष ग्राम बनाने की मांग की। हालांकि विभाग विभाग ने यहां 80 नाली भूमि 2013 में ली, लेकिन तब से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।
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कोट
घेस गांव को आयुष गांव बनाने के लिए 80 नाली भूमि मांगी गई, जिससे किसानों को तकनीकी जानकारी के साथ ही विपणन आदि की भी सुविधा मिलती, लेकिन चार वर्ष बाद भी प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इस बारे में क्षेत्र का एक प्रतिनिधिमंडल शीघ्र सीएम से मिलेगा। - केशर बिष्ट, पूर्व प्रधान घेस गांव।
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घेस को आयुष ग्राम बनाने का प्रस्ताव आठ अगस्त को दोबारा निदेशालय को भेजा गया है। आयुष ग्राम स्थापित होने पर घेस सहित अन्य गांवों के किसानों को बहुत लाभ होगा। - डा. रघुवीर सिंह, जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी चमोली।