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महमूदपुर में संगीनों के साये में होता है जला भिषेक
Updated Sun, 22 Jul 2018 12:20 AM IST
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पिरान कलियर। पिरान कलियर के महमूदपुर स्थित प्राचीन मंदिर भगवान शंकर कर्णधाम में संगीनों के साये में जलाभिषेक किया जाता है। यह मंदिर घनी मुस्लिम आबादी से घिरा हुआ है। वर्ष 2010 में एक बार मंदिर पर विवाद हो गया था। इस विवाद को छोड़ दें तो हर साल आपसी सौहार्द की मिसाल देखने को मिली है। हालांकि एतिहात के तौर पर कांवड़ के दौरान मंदिर पर पुलिस फोर्स तैनात की जाती है।
पिरान कलियर के महमूदपुर गांव में प्राचीन मंदिर भगवान शंकर कर्णधाम है। वैसे तो इस मंदिर का जीर्णोद्वार 2010 में हुआ था, लेकिन माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण करीब तीन सौ साल पुराना है। इस मंदिर के पास एक कुआं है। जिसके पास गड़ा अभिलेख आज तक पढ़ा नहीं जा सकता है। मंदिर के पुजारी श्याम सिंह ने बताया कि 2010 के दौरान ही कुछ शरारती तत्वों ने गोबर आदि मंदिर में फेंक दिया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था, हालांकि प्रशासन ने इस दौरान मुस्तैदी से काम लेते हुए मामले को नियंत्रण में कर दिया था। यह मंदिर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस गांव और आस-पास में मुस्लिम आबादी है। जिससे देखते हुए प्रतिवर्ष कांवड़ के दौरान प्रशासन फोर्स तैनात करती है। मंदिर से जुड़े से केके शर्मा ने बताया कि इस मंदिर में यदि 2010 को छोड़ दे, तो कभी कोई विवाद नहीं हुआ है। यहां मुस्लिम समाज के लोगों ने कभी हिंदू की आस्था को भी ठेस नहीं पहुंचाई है। जिससे यह मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल है।
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पिरान कलियर के महमूदपुर गांव में प्राचीन मंदिर भगवान शंकर कर्णधाम है। वैसे तो इस मंदिर का जीर्णोद्वार 2010 में हुआ था, लेकिन माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण करीब तीन सौ साल पुराना है। इस मंदिर के पास एक कुआं है। जिसके पास गड़ा अभिलेख आज तक पढ़ा नहीं जा सकता है। मंदिर के पुजारी श्याम सिंह ने बताया कि 2010 के दौरान ही कुछ शरारती तत्वों ने गोबर आदि मंदिर में फेंक दिया था, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया था, हालांकि प्रशासन ने इस दौरान मुस्तैदी से काम लेते हुए मामले को नियंत्रण में कर दिया था। यह मंदिर इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इस गांव और आस-पास में मुस्लिम आबादी है। जिससे देखते हुए प्रतिवर्ष कांवड़ के दौरान प्रशासन फोर्स तैनात करती है। मंदिर से जुड़े से केके शर्मा ने बताया कि इस मंदिर में यदि 2010 को छोड़ दे, तो कभी कोई विवाद नहीं हुआ है। यहां मुस्लिम समाज के लोगों ने कभी हिंदू की आस्था को भी ठेस नहीं पहुंचाई है। जिससे यह मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की भी मिसाल है।
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