{"_id":"5bc0d2ccbdec226976529d65","slug":"11539363532-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेज दर्द में भी दादा-दादा चिल्लाते रहे वंश और शानू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेज दर्द में भी दादा-दादा चिल्लाते रहे वंश और शानू
Updated Fri, 12 Oct 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रुद्रप्रयाग। कार हादसे में घायल दोनों बच्चे तेज दर्द से छाई बेहोशी में भी अपने दादा को याद करते रहे। जिला अस्पताल में उपचार के दौरान वंश और शानू बार-बार अपने दादा को पुकार रहे थे। बच्चों के बार-बार ‘दादा कहां हो, दादा आ जाओ’ दोहराने से वहां मौजूद अन्य लोगों की आंखें भी भर आई।
शुक्रवार सुबह सुरेंद्र सिंह भंडारी अपने दोनों पोतों वंश और शानू के साथ मूल गांव थपलगांव जाने के लिए तैयार हुए। तब दोनों बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। दादा ने बच्चों के लिए चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट, नमकीन घर से ही रख दी थी। यहां तक कि गांव के लिए सब्जी व खाने का तेल व अन्य सामग्री सहित ठंड से बचने के लिए गर्म कंबल भी वाहन में रख दिए थे। करीब 11 बजे वे गौचर से रवाना हुए। पौने दो घंटे के सफर में वंश और शानू अपने दादा से खूब बतियाते रहे। इस दौरान अपने पोतों की अठखेलियों से दादा भी खुश थे, लेकिन काल को शायद यह मंजूर नहीं था। कार थपलगांव से करीब 17 किमी पहले सगणू गांव के पास अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
घायल बच्चों के पिता सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उनके दोनों बच्चों का अपने दादा (सुरेंद्र सिंह भंडारी) से खूब लगाव था। दादा के साथ स्कूल जाना व घर आने के साथ ही खेलना और खाना भी साथ ही होता था। यहां तक कि दोनों बच्चों को अक्सर उनके दादा ही नहलाते और तैयार करते थे। ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार सुबह सुरेंद्र सिंह भंडारी अपने दोनों पोतों वंश और शानू के साथ मूल गांव थपलगांव जाने के लिए तैयार हुए। तब दोनों बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं था। दादा ने बच्चों के लिए चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट, नमकीन घर से ही रख दी थी। यहां तक कि गांव के लिए सब्जी व खाने का तेल व अन्य सामग्री सहित ठंड से बचने के लिए गर्म कंबल भी वाहन में रख दिए थे। करीब 11 बजे वे गौचर से रवाना हुए। पौने दो घंटे के सफर में वंश और शानू अपने दादा से खूब बतियाते रहे। इस दौरान अपने पोतों की अठखेलियों से दादा भी खुश थे, लेकिन काल को शायद यह मंजूर नहीं था। कार थपलगांव से करीब 17 किमी पहले सगणू गांव के पास अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
विज्ञापन
घायल बच्चों के पिता सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उनके दोनों बच्चों का अपने दादा (सुरेंद्र सिंह भंडारी) से खूब लगाव था। दादा के साथ स्कूल जाना व घर आने के साथ ही खेलना और खाना भी साथ ही होता था। यहां तक कि दोनों बच्चों को अक्सर उनके दादा ही नहलाते और तैयार करते थे। ब्यूरो
विज्ञापन