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हाथियों के प्राकृतिक वास में दखल कम होने से नुकसान घटा
Updated Sun, 04 Mar 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादूून।
हाथियों के प्राकृतिक वास स्थलों पर लोगों का दखल कम होने से राजाजी टाइगर रिजव क्षेत्र की सीमा से सटे गांवों में फसलों को नुकसान कम हुआ है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन बोर्ड के मुताबिक इस बार बफर क्षेत्र (सीमा से लगे गांव) में हाथी नहीं दिखे। इसकी मुख्य वजह टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे वन गुर्जरों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जाना है। अब तक 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जा चुका है।
राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सीमा से सटे दौड़वाला, खट्टापानी, बड़कली, दूधली, नागल बुलंदावाला, नागल ज्वालापुर, सिमलासग्रांट आदि क्षेत्रों में हर साल हाथी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते थे। आबादी क्षेत्र में हाथियों के आने से फसलों को नुकसान के अलावा जान माल का खतरा भी रहता है, लेकिन इस बार हाथियों के प्राकृतिक वास स्थलों पर लोगों का दखल कम होने से हाथियों ने कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया। इसकी एक प्रमुख वजह 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जाना बताया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन बोर्ड के सदस्य दरपान सिंह बोरा के मुताबिक राजाजी टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बसे वन गुर्जर हाथियों को खदेड़ने के लिए मशाल जलाकर एवं विभिन्न माध्यम अपनाते हैं। इसके बाद हाथी रिजर्व क्षेत्र की सीमा से सटे गांवों की ओर रुख करते हैं। बहरहाल इस बार वन गुर्जरों को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर कर दिया गया। इसके चलते हाथियों का उत्पात कम रहा। इसके अलावा हाथी अवरोधक दीवार भी हाथियों को रोकने में काफी हद तक कारगर साबित रही।
143 वन गुर्जर परिवार किए सीमा से बाहर
राजाजी टाइगर रिजर्व की चीलावाली, गोहरी एवं रामगढ़ रेंज से 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व की सीमा से बाहर किया गया है। हालांकि अब भी 18 वन गुर्जर परिवार विभिन्न कारणों से पार्क की सीमा के अंदर निवासरत हैं।
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हाथियों के प्राकृतिक वास स्थलों पर लोगों का दखल कम होने से राजाजी टाइगर रिजव क्षेत्र की सीमा से सटे गांवों में फसलों को नुकसान कम हुआ है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन बोर्ड के मुताबिक इस बार बफर क्षेत्र (सीमा से लगे गांव) में हाथी नहीं दिखे। इसकी मुख्य वजह टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बसे वन गुर्जरों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जाना है। अब तक 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जा चुका है।
राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र की सीमा से सटे दौड़वाला, खट्टापानी, बड़कली, दूधली, नागल बुलंदावाला, नागल ज्वालापुर, सिमलासग्रांट आदि क्षेत्रों में हर साल हाथी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते थे। आबादी क्षेत्र में हाथियों के आने से फसलों को नुकसान के अलावा जान माल का खतरा भी रहता है, लेकिन इस बार हाथियों के प्राकृतिक वास स्थलों पर लोगों का दखल कम होने से हाथियों ने कोई खास नुकसान नहीं पहुंचाया। इसकी एक प्रमुख वजह 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व क्षेत्र से बाहर किया जाना बताया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन बोर्ड के सदस्य दरपान सिंह बोरा के मुताबिक राजाजी टाईगर रिजर्व क्षेत्र में बसे वन गुर्जर हाथियों को खदेड़ने के लिए मशाल जलाकर एवं विभिन्न माध्यम अपनाते हैं। इसके बाद हाथी रिजर्व क्षेत्र की सीमा से सटे गांवों की ओर रुख करते हैं। बहरहाल इस बार वन गुर्जरों को राजाजी टाइगर रिजर्व क्षेत्र से बाहर कर दिया गया। इसके चलते हाथियों का उत्पात कम रहा। इसके अलावा हाथी अवरोधक दीवार भी हाथियों को रोकने में काफी हद तक कारगर साबित रही।
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143 वन गुर्जर परिवार किए सीमा से बाहर
राजाजी टाइगर रिजर्व की चीलावाली, गोहरी एवं रामगढ़ रेंज से 143 वन गुर्जर परिवारों को रिजर्व की सीमा से बाहर किया गया है। हालांकि अब भी 18 वन गुर्जर परिवार विभिन्न कारणों से पार्क की सीमा के अंदर निवासरत हैं।
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