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क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट: मानक शिथिल करने की तैयारी
Updated Tue, 27 Feb 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
निजी चिकित्सकों के विरोध के स्वास्थ्य विभाग क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट के कुछ मानकों को शिथिल किए जाने की तैयारी है। ओटी के साइज, वार्ड और बेड की दूरी आदि के मानक शिथिल किए जा सकते हैं।
प्रदेश के चिकित्सालयों एवं नर्सिंग होम के लिए क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट लागू किया जाना है। प्रदेश में 31 अक्तूबर 2015 को इसकी अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से इस एक्ट का लगातार विरोध किया जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से इस तरह के कड़े मानकों को थोपा जाना ठीक नहीं हैं। यदि एक्ट को जबरन लागू कराया गया तो इससे इलाज महंगा हो सकता है। वहीं, जब सरकारी अस्पताल मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में निजी अस्पतालों के लिए मानकों को कड़ा किया जाना ठीक नहीं हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस थपलियाल ने कहा कि निजी चिकित्सकों के साथ विभाग कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मार्च में एक और बैठक के बाद कुछ मानकों को शिथिल कर इसे लागू कराया जाएगा। वही आईएमए के प्रदेश महासचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि एक्ट को प्रदेश सरकारों की ओर से अपने हिसाब से लागू कराया जाना है। सरकार से मांग की जा रही है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां के लिए अलग से मानक तय किए जाएं। इस प्रकरण को लेकर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल जल्द मुख्यमंत्री से मिलेगा।
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निजी चिकित्सकों के विरोध के स्वास्थ्य विभाग क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट के कुछ मानकों को शिथिल किए जाने की तैयारी है। ओटी के साइज, वार्ड और बेड की दूरी आदि के मानक शिथिल किए जा सकते हैं।
प्रदेश के चिकित्सालयों एवं नर्सिंग होम के लिए क्लीनिकल स्टेब्लिसमेंट एक्ट लागू किया जाना है। प्रदेश में 31 अक्तूबर 2015 को इसकी अधिसूचना जारी की गई थी, लेकिन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की ओर से इस एक्ट का लगातार विरोध किया जा रहा है। एसोसिएशन का कहना है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से इस तरह के कड़े मानकों को थोपा जाना ठीक नहीं हैं। यदि एक्ट को जबरन लागू कराया गया तो इससे इलाज महंगा हो सकता है। वहीं, जब सरकारी अस्पताल मानकों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं ऐसे में निजी अस्पतालों के लिए मानकों को कड़ा किया जाना ठीक नहीं हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वाईएस थपलियाल ने कहा कि निजी चिकित्सकों के साथ विभाग कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मार्च में एक और बैठक के बाद कुछ मानकों को शिथिल कर इसे लागू कराया जाएगा। वही आईएमए के प्रदेश महासचिव डॉ. डीडी चौधरी का कहना है कि एक्ट को प्रदेश सरकारों की ओर से अपने हिसाब से लागू कराया जाना है। सरकार से मांग की जा रही है कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से यहां के लिए अलग से मानक तय किए जाएं। इस प्रकरण को लेकर एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल जल्द मुख्यमंत्री से मिलेगा।
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