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कुतों के हमले से घायल बारहसिंगा की हुई मौत
Updated Sun, 27 May 2018 10:51 PM IST
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कुत्तों के हमले से घायल बारहसिंगा की हुई मौत
गांव गहलब में कुत्तों के हमले से घायल दुर्लभ वन्यप्राणी बारहसिंगा मिला। रविवार को सुबह बच्चे उसे कुत्तों के हमले से बचा रहे थे इस बीच जगदीश नामक ग्रामीण वहां पहुंचा, उसने बारहसिंगा को अपने पशुबाड़े में रखा। मौके पर पशुपालन विभाग के चिकित्सक रणसिंह एवं पशु चिकित्सा के विशेषज्ञ डॉक्टर विजय को बुलाया तथा वन्यप्राणी विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। पशुपालन के चिकित्सकों ने बारहसिंगा को चिकित्सा प्रदान की। घायल बारहसिंगा जिंदगी और मौत से कई घंटे जूझता रहा। आखिरकार सुबह 10 बजे करीब उसकी मौत हो गई। इस बारे में बारहसिंगा को संरक्षण प्रदान करने वाले जगदीश का कहना है कि उन्होंने स्थानीय बहीन थाना, डिप्टी कमिश्नर के रीडर, एक पूर्व मंत्री, लोकल एमएलए केहर सिंह रावत, पशु चिकित्सा अधिकारियों को मोबाइल से फोन करके सूचित कर दिया था इसके बावजूद न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी आया और न ही कोई वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। कई घंटों तक बारहसिंगा तड़पता रहा। उनका कहना है कि यदि समय रहते उसकी उचित चिकित्सा होती और किसी बड़े अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। वन्यप्राणी विभाग के अधिकारी 11 बजे के लगभग गांव गहलब मेें पहुंचे। उन्होंने उक्त बारहसिंगा के मृत शरीर को अपने कब्जे में ले लिया। उनका कहना है कि पलवल और फरीदाबाद जिलों के लिए मात्र दो ही वन्यप्राणी विभाग के कर्मचारी हैं। इंस्पेक्टर चरण सिंह और गार्ड राजकुमार, इसी के चलते समय पर सभी स्थानों की शिकायत मिलने पर पहुंच नहीं पाते हैं। रविवार को कई अन्य स्थानों से भी इसी प्रकार की शिकायतें मिली थीं। उनका निवारण कर रहे थे। इसी कारण से विलंब हो गया। वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसा न हो, इसके उपाय किए जाएंगे। गांव गहलब के लोगों में प्रशासनिक अव्यवस्था के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।
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गांव गहलब में कुत्तों के हमले से घायल दुर्लभ वन्यप्राणी बारहसिंगा मिला। रविवार को सुबह बच्चे उसे कुत्तों के हमले से बचा रहे थे इस बीच जगदीश नामक ग्रामीण वहां पहुंचा, उसने बारहसिंगा को अपने पशुबाड़े में रखा। मौके पर पशुपालन विभाग के चिकित्सक रणसिंह एवं पशु चिकित्सा के विशेषज्ञ डॉक्टर विजय को बुलाया तथा वन्यप्राणी विभाग के अधिकारियों को सूचित किया। पशुपालन के चिकित्सकों ने बारहसिंगा को चिकित्सा प्रदान की। घायल बारहसिंगा जिंदगी और मौत से कई घंटे जूझता रहा। आखिरकार सुबह 10 बजे करीब उसकी मौत हो गई। इस बारे में बारहसिंगा को संरक्षण प्रदान करने वाले जगदीश का कहना है कि उन्होंने स्थानीय बहीन थाना, डिप्टी कमिश्नर के रीडर, एक पूर्व मंत्री, लोकल एमएलए केहर सिंह रावत, पशु चिकित्सा अधिकारियों को मोबाइल से फोन करके सूचित कर दिया था इसके बावजूद न तो कोई प्रशासनिक अधिकारी आया और न ही कोई वन्य प्राणी विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे। कई घंटों तक बारहसिंगा तड़पता रहा। उनका कहना है कि यदि समय रहते उसकी उचित चिकित्सा होती और किसी बड़े अस्पताल में शिफ्ट कर दिया जाता तो उसकी जान बच सकती थी। वन्यप्राणी विभाग के अधिकारी 11 बजे के लगभग गांव गहलब मेें पहुंचे। उन्होंने उक्त बारहसिंगा के मृत शरीर को अपने कब्जे में ले लिया। उनका कहना है कि पलवल और फरीदाबाद जिलों के लिए मात्र दो ही वन्यप्राणी विभाग के कर्मचारी हैं। इंस्पेक्टर चरण सिंह और गार्ड राजकुमार, इसी के चलते समय पर सभी स्थानों की शिकायत मिलने पर पहुंच नहीं पाते हैं। रविवार को कई अन्य स्थानों से भी इसी प्रकार की शिकायतें मिली थीं। उनका निवारण कर रहे थे। इसी कारण से विलंब हो गया। वन्य प्राणी विभाग के कर्मचारियों ने बताया कि भविष्य में ऐसा न हो, इसके उपाय किए जाएंगे। गांव गहलब के लोगों में प्रशासनिक अव्यवस्था के प्रति गहरा रोष व्याप्त है।